‘हम तो अस्पताल की इमरजेंसी में होते’… भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत देख बोलीं आतिशी
दिल्ली में 24 दिन से जारी कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के निश्चितकालीन भूख हड़ताल को समर्थन देने के लिए आम आदमी पार्टी के कई नेता जंतर-मंतर पहुंचे।

शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 16वें दिन आम आदम पार्टी (आप) का साथ मिला। पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री अतिशी समेत पार्टी के अन्य नेता प्रदर्शन स्थल पहुंचे। इस दौरान आतिशी ने वांगचुकी की गिरती सेहत पर चिंता जताई।
आतिशी ने अपने संबोधन में कहा 'सोनम जी का ये हाल देखकर मेरी आंखों में आंसु आ गए हैं। वो व्यक्ति जिसने शिक्षा में एक क्रांति की शुरुआत की जिसको पूरे देश ने देखा। आज वो इंसान 16 दिन से बिना कुछ खाए इतनी गर्मी में अनशन पर बैठा हुआ है। जिसका साढ़े आठ किलो वजन कम हो गया है शुगर 60-70 पर पहुंच गया है और ब्लड प्रेशर इतना कम हो गया है। अगर आप और हम इस हाल में होते न तो हम अस्पताल की इमरजेंसी में होते।'
आतिशी ने कहा - सरकार गूंगी-बहरी पत्थर दिलवाली
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा ‘सोनम वांगचुक को नीट, एसएससी और टीईटी का एग्जाम नहीं देना। वो अपने लिए नहीं लड़ रहे हैं बल्कि देश के युवाओं के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने आज अपनी जान की बाजी लगा दी है। लेकिन ये ऐसी गूंगी-बहरी पत्थर दिल सरकार है जिसे सोनम जी का ये हाल नहीं दिख रहा। इन्हें उन बच्चों के चेहरे नहीं दिख रहे हैं जिन्होने नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या कर ली।’
'सरकार को झुकना होगा'
आतिशी ने इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे कर करते हुए कहा ‘पेपर लीक से करोड़ों युवाओं का भविष्य तबाह हो रहा है। इसके जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए सोनम वांगचुक जी और छात्र 16 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। हम युवाओं के हक की इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं। भाजपा की इस तानाशाह सरकार को झुकना ही होगा।’
अभिजीत दीपके ने की ये अपील
वहीं 'कॉकरोच जनता पार्टी' के फाउंडर अभिजीत दीपके ने केंद्र से अपील की कि वह इस मुद्दे को 'अहंकार की लड़ाई' न बनाएं और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान दे। दीपके ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ‘वांगचुक की भूख हड़ताल का 16वां दिन है। मैं सरकार से गुजारिश करता हूं कि वह इसे अहंकार की लड़ाई न बनाए, क्योंकि यहां इंसानी जिंदगियां दांव पर लगी हैं। अपनी गलती मानना कमजोरी की निशानी नहीं है। यह परिपक्वता, जवाबदेही और अपनी गलती सुधारने की इच्छा का संकेत है। हम बस जवाबदेही चाहते हैं।’
संसद मार्च की तैयारी में कॉकरोच पार्टी
आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी 20 जुलाई को तक मार्च निकालने का भी एलान कर चुकी है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या करने वाले स्टूडेंट्स के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग पर भी अड़ी हुई है।


