AAP गुजरात को SC से राहत, इंस्टा फेसबुक अकाउंट बहाल करने के निर्देश; अरविंद केजरीवाल ने फिर दागा ‘तानाशाह’ वाला तीर
गुजरात में आम आदमी पार्टी का फेसबुक और इंस्टा अकाउंट बहाल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मेटा को निर्देश जारी कर दिए हैं। आप ने कोर्ट में याचिका दायर कर अंतरिम राहत की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को आम आदमी पार्टी गुजरात के आधिकारिक इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट को बहाल करने का निर्देश दिया है। मेटा ने इसी साल अप्रैल में पार्टी के दोनों अकाउंट को ब्लॉक कर दिया था। आप की ओर से इस मामले में याचिका दायर कर इसबात पर आपत्ति जताई गई थी कि यूजर को बिना सूचित किए एक्शन लिया गया।
लाइव लॉ के मुताबिक, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने दलीलें सुनने के बाद मेटा को तुरंत अकाउंट्स को बहाल करने के लिए कहा है। बेंच ने आम आदमी पार्टी को यह राहत देते हुए शर्त रखी की आपत्तिजनत पोस्ट को हटाया जाए। आप की ओर से कहा गया था कि भारतीय जनता पार्टी गुजरात में आप की बढ़ती लोकप्रियता से घबराई हुई है तभी अकाउंट्स को ब्लॉक करवाया गया।
केजरीवाल ने दी तीखी प्रतिक्रिया
वहीं फैसले पर आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने आप नेता दुर्गेश पाठक की एक पोस्ट को शेयर करते हुए एक्स पर लिखा 'ये एक डरे हुए तानाशाह के लक्षण है।'
दुर्गेश पाठक ने पूछा- देश में तानाशाही नहीं है?
दुर्गेश पाठक ने इस पोस्ट में लिखा कि ‘करोड़ों गुजरातियों तक पहुंचने वाला आप गुजरात का फेसबुक-इंस्टाग्राम पेज चुनाव से एक दिन पहले बंद कर दिया गया वो भी बिना नोटिस, बिना सुनवाई। प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल का पूरे कम्यूनिकेशन सिस्टम को 4 महीने तक चुप कराया गया। आज जब 4 महीने बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेटा को पेज बहाल किया है तो क्या अब भी कोई शक बचता है कि देश में तानाशाही नहीं है?’
आप ने एक्शन पर जताई थी कड़ी आपत्ति
दरअसल आम आमदी पार्टी की ओर से सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के सोशल मीडया अकाउंट्स को इस तरह बिना कारण बताए और बिना सुनवाई के बंद कर देना असंवैधानिक है। फरासत मामले में कोर्ट से लगातार अंतरिम राहत की मांग कर रहे थे। कोर्ट ने अब इस मामले में अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की है।
आप बोली- बिना बताए ही ब्लॉक कर दिए अकाउंट्स
आम आदमी पार्टी का आरोप था कि इस मामले में न तो इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, न गुजरात सरकार या पुलिस और न ही मेटा ने कोई आधिकारिक आदेश, कारण या पूर्व सूचना दी। पार्टी ने दावा किया था कि इस तरह की कार्रवाई विपक्ष की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली है।


