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डॉक्टर राही मासूम रजा ने युवाओं को ख्वाब देखने के लिए प्रेरित किया: मनोज सिन्हा

डॉक्टर राही मासूम रजा ने युवाओं को ख्वाब देखने के लिए प्रेरित किया: मनोज सिन्हा

संक्षेप:

आइडिया कम्युनिकेशन्स, कश्मीर विश्वविद्यालय, मजलिस फख्र ए बहरीन, कश्मीर विश्वविद्यालय तथा जेके बैंक के संयुक्त तत्वाधान में राही की विरासत के नाम से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ…

Sat, 1 Nov 2025 04:09 PMHindustan लाइव हिन्दुस्तान
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श्रीनगर। डॉक्टर राही मासूम रजा ने युवाओं को ख्वाब देखने के लिए प्रेरित किया। एक जगह उन्होंने लिखा था कि नई नस्ल तो हमारी नस्ल से भी ज्यादा घाटे में है। हमारे पास कोई ख्वाब नहीं है। मगर इनके पास तो झूठे ख्वाब हैं। वह चाहते थे कि स्वयं की ताकत को पहचानकर नौजवान आगे बढ़ें। उक्त बातें जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने आइडिया कम्युनिकेशन्स, मजलिस फख्र ए बहरीन, कश्मीर विश्वविद्यालय तथा जेके बैंक के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी राही की विरासत के उद्घाटन सत्र में कही।

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उन्होंने कहा कि राही की समृद्ध वसीयत में मुझे यह स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि स्वयं को जानने का अनमोल हीरा वह मानवता के लिए छोड़ गए हैं। जैसी गंगा शुद्ध है, पवित्र है वैसी शुद्धता आत्म-ज्ञान और स्वयं का साक्षात्कार है और राही साहब की इस विरासत को सहेजना तथा उन आदर्शों का प्रसार करना आवश्यक है।

राही साहब की एक और विरासत जीवन को समग्रता से जीने की कला है। चाहे संघर्ष के दिन हो या सफलता के दिन हों, राही साहब का हृदय कभी भी रिक्त और सूना नहीं रहा। कई बार जब कार्यक्रम आयोजित होते हैं तब मान लिया जाता है कि चलो साहब काम पूरा हो गया लेकिन मेरा मानना है कि असली काम सेमिनार समाप्त होने के बाद शुरू होता है। इस आयोजन में भी राही के विजन को उनके आदर्शों को सामान्य जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। राही का आदर्श भारत के प्रगतिशील समाज के लिए एक अदृश्य इंफ्रास्ट्रक्चर, एक अमूर्त बुनियादी ढांचा है जिसके द्वारा हमें सामाजिक बंधन, आपसी विश्वास और साझा मूल्यों की परंपरा को और मजबूत करना है। उनके विचार हमें सामाजिक रूप से हाशिए पर पड़े समूहों का उत्थान करने के लिए प्रेरित करते हैं। वह आपसी मतभेद, विभाजन को कम करके एकता की ऊर्जा द्वारा व्यक्तिगत क्षमता को व्यापक समृद्धि में बदलने के लिए प्रेरित करते हैं।

बतौर मुख्य अतिथि अपने भाषण में सिन्हा ने कहा इस सेमिनार का उद्देश्य है कि विकसित भारत के लिए राही के विचारों और आदर्शों द्वारा नए दृष्टिकोण, नई सोच, नए विचारों के बीज बोया जाए ताकि समाज एवं राष्ट्र को एक नई दिशा दी जा सके और मुझे पूरी उम्मीद है कि समाज के लिए नया चिंतन और नई दिशा इस तीन दिवसीय अमृत मंथन से अवश्य निकलेगा। इस सेमिनार से एक संदेश जाना चाहिए कि एकता, हर एक इंसान की खुशी और राष्ट्र की संपन्नता हमारी प्राथमिकता होगी। दूसरा, हमें निरंतर समाज में आत्मविश्वास जाग्रत करना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर निलोफर खान (कुलपति कश्मीर विश्वविद्यालय) ने की, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर नवीन चंद लोहनी (कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय) और श्री बृजमोहन शर्मा (प्रमुख सचिव संस्कृति, जम्मू-कश्मीर) शामिल हुए।

जाने माने बालीवुड गीतकार समीर अनजान ने भी वक्तव्य दिया। आसिफ आजमी (डायरेक्टर आइडिया कम्यूनिकेशन) ने स्वागत भाषण दिया वहीं प्रोफेसर परवेज अहमद (डीन छात्र कल्याण विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय) ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शाहिद अली खान ने किया। इस अवसर पर डॉ. नूर अमरोहवी (विख्यात उर्दू कवि), अजीत सिंह (एडिटर भोजपुरी संगम पत्रिका), विजय धर (शिक्षाविद, चेयरमैन डीपीएस, डायरेक्टर आइनेक्स मल्टीप्लेक्स) और प्रोफेसर मिर्जा मोहम्मद जमां आजुरदह (उर्दू लेखक और राही साहित्य के ज्ञाता) को उनके शैक्षणिक, साहित्यिक और सामाजिक योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र से सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर निलोफर खान ने कहा कि राही मासूम रज़ा जैसे लेखक हमें याद दिलाते हैं कि साहित्य समाज का आईना ही नहीं, उसका मार्गदर्शक भी है।

मुख्य वक्ता समीर अनजान ने कहा कि राही साहब ने शब्दों को जिस आत्मा से जोड़ा, वही उन्हें अद्वितीय बनाता है। फ़िल्मी गीतों से लेकर उपन्यासों तक, उनकी भाषा आम आदमी की धड़कन बन जाती है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. नवीन चंद लोहनी, कुलपति, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी ने कहा कि राही साहब का साहित्य सीमाओं को नहीं, संवेदनाओं को मानता है। उनका लेखन आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो उठा है।

आसिफ आजमी ने स्वागत भाषण में कहा कि इस अंतर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य राही शताब्दी वर्ष का बिगुल बजाना और जो अगस्त 2026 से आरंभ हो रही है। उनकी विचारधारा आज भी संवाद की भाषा में जीवित है।

राही की विरासत पर केंद्रित इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कतर से अजीज नबील, अमेरिका से डॉ. नूर अमरोहवी, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रोफेसर अबू बकर अब्बाद, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से प्रोफेसर शाफे किदवई, पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय कोलकाता से प्रोफेसर अरुण होता, जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली से डॉ० मुशीर अहमद, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली से प्रोफ़ेसर जितेंद्र श्रीवास्तव, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से प्रोफेसर गजनफर अली खान, दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से प्रोफेसर दीपक प्रकाश त्यागी, कश्मीर विश्वविद्यालय से प्रोफ़ेसर एजाज़ मोहम्मद शेख, खलील उर रहमान, दिल्ली के अलावा उर्दू हिन्दी के लगभग 40 प्रोफेसर्स और स्कालर्स अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। वहीं 02 नवंबर को शाम सात बजे टैगोर हाल श्रीनगर में जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी के सहयोग से मुशायरे और कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें प्रोफ़ेसर नवीन चंद लोहनी (हल्द्वानी), प्रोफेसर जितेंद्र श्रीवास्तव (दिल्ली) प्रोफेसर अबू बकर अब्बाद (दिल्ली) डॉ० नूर अमरोहवी (अमेरिका), अजीज नबील (कतर) और आसिफ बिलाल (दिल्ली) प्रस्तुति देंगे।