‘OG’ से लेकर ‘धुरंधर’ तक... पीएम नरेंद्र मोदी के 'जेन जी स्टाइल' ने SRCC में लूटी महफिल
प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसआरसीसी में ‘जेन जी’ की बोलचाल वाले शब्द कहे। इस दौरान अपने भाषण के दौरान उन्होंने ‘ओजी’, ‘धुरंधर’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने संबोधन में 'ओजी' जैसे 'जेन जी' के बीच लोकप्रिय शब्दों का इस्तेमाल किया और फिल्म 'धुरंधर' का भी जिक्र किया। दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह में मोदी ने 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर दिए अपने संबोधन को याद किया।
जहां ''ओजी'' (ओरिजिनल गैंगस्टर) एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल आम बोलचाल में ''पुराने और असली खिलाड़ी'', भरोसेमंद, अनुभवी या पुराने दौर की शैली वाले व्यक्ति के लिए किया जाता है तो वहीं "धुरंधर" का मतलब दिग्गज या अपने क्षेत्र का माहिर व्यक्ति होता है।
पूर्व छात्रों को बताया 'ओजी' और 'धुरंधर'
मोदी ने कॉलेज के शताब्दी समारोह में अपने संबोधन के दौरान कहा, "एसआरसीसी के पूर्व छात्र बहुत खास रहे हैं... उन्होंने कॉलेज की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया। अगर मैं आपकी भाषा में कहूं, तो यहां के पूर्व छात्र 'ओजी' हैं।"
पूर्व छात्रों की प्रशंसा करते हुए मोदी ने कहा, "धुरंधर न हों, लेकिन धूम मचाई है।"
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद कोशिश
एसआरसीसी में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इन शब्दों का इस्तेमाल ऐसे समय में हुआ है, जब जंतर-मंतर पर हाल में हुए 'जेन जी' के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बाद भाजपा और उसके नेता युवा वर्ग से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे युवाओं तक संदेश पहुंचाने के लिए इंस्टाग्राम-स्टाइल के वीडियो का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।
2013 में भी दिया था एसआरसीसी में भाषण
प्रधानमंत्री मोदी ने 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में एसआरसीसी का दौरा किया था और छात्रों के बीच उनके उस संबोधन को काफी लोकप्रियता मिली थी। खासकर 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले, जब वह भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, उनके भाषण ने तब सभी का ध्यान खींचा था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय उनके संबोधन ने ''लहर'' पैदा की थी और आज भी 13-14 साल बाद भी उसका असर बरकरार है।
पानी से भरे गिलास के जरिए समझाने की कोशिश की थी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''2013 में जब मैं एसआरसीसी आया था, तब मैंने एक दृष्टिकोण पेश किया था। उस समय मैंने जो कुछ कहा था, वह मेरा दृढ़ विश्वास था। मैंने हमेशा उन बातों को अपने जीवन में उतारा है। देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने की भावना ही शब्दों के रूप में सामने आई थी। मैंने पानी से भरे गिलास का उदाहरण दिया था। कुछ लोग गिलास को आधा भरा देखते हैं, जबकि कुछ लोग उसे आधा खाली बताते हैं।''
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''मैंने कहा था कि ऐसे लोग हैं जो गिलास को पूरी तरह भरा हुआ देख सकते हैं- आधा पानी से और आधा हवा से। वह ऐसा समय था, जब देश में उम्मीद की कमी थी। इसलिए मैंने कहा था, 'मैं इस गिलास को पूरी तरह भरा हुआ देखता हूं'।"


