‘कबाड़’ बनी 18 साल पुरानी बाइक तो मांगा 1.43 करोड़ मुआवजा, शख्स पहुंच गया दिल्ली हाई कोर्ट; जजों का राहत देने से इनकार

By Mohit
पीटीआई, नई दिल्ली
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दिल्ली में एक शख्स की बाइक को उसके घर के आगे से ही जब्त कर लिया गया था। शख्स ने इसके बाद 1.43 करोड़ रुपये की मुआवजे की मांग के लिए कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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शख्स ने कहा कि उसकी बाइक को बिना नोटिस दिए ही स्क्रैप कर दिया गया। (AI प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिल्ली में एक शख्स की पुरानी हो चुकी बाइक को कथित तौर पर जब्त करने के बाद स्क्रैप कर दिया गया जिसके बाद शख्स ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में शख्स ने नगर प्रशासन से एक करोड़ रुपये से ज्यादा के मुआवजे की मांग की मगर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। वाहन मालिक ने याचिका में सिंगल जज के फैसले को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने यह फैसला सुनाया।

दरअसल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने 18 साल पुरानी बाइक को दिसंबर 2024 में इस वजह से जब्त कर लिया था क्योंकि वह एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल (ईएलवी) कैटेगरी में थी और इसी के तरह उसे स्क्रैप करवाया गया। वहीं अपीलकर्ता का कहना है कि बाइक उनके घर के बाहर खड़ी थी और किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं फैला रही थी। यही नहीं अपीलकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि बाइक बीते चार साल से इस्तेमाल में नहीं थी।

याचिकाकर्ता का दावा - नोटिस तक नहीं दिया

अपीलकर्ता ने यह भी दावा किया कि उसे नोटिस दिए बिना ही बाइक को स्क्रैप करवा दिया गया जो कि संविधान के आर्टिकल 300ए का सीधा उल्लंघन है।

आर्टिकल 300ए में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के अधिकार के अलावा उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।

बाइक से था बेहद लगाव

याचिकाकर्ता की ओर से इसके बाद 1.43 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की गई। शख्स ने मुआवजे की यह मांग रकम गलत तरीके से बाइक जब्त और स्क्रैप करने के वजह से लंबे समय से हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न को देखते हुए की। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह बाइक से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था।

मानहानि के लिए मुआवजे की मांग

शख्स का कहना है कि उसने अपनी बेहद कीमती, अच्छी तरह से रखी गई और एक एंटीक पर्सनल सामान को खो दिया। इस वजह से वह मानहानि के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है।

प्रशासन की ओर से क्या जवाब?

वहीं दूसरी ओर अधिकारियों ने कहा कि 'व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) के रजिस्ट्रेशन और कामकाज से जुड़े नियम, 2021' के तहत बाइक को स्क्रैप किया गया है क्योंकि वाहन मालिक तीन हफ्ते के भीतर जरूरी अंडरटेकिंग (हलफनामा) नहीं दे सका।

सिंगल बेंच के फैसले पर दखल देने से इनकार

डिविजन बेंच ने 24 अगस्त को दिए फैसले में सिंगल जज के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता को सिविल कोर्ट में मुकदमा करने के लिए कहा गया था।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा 'एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल (ईएलवी) को जब्त कर उन्हें स्क्रैप करवाना आरवीएसएफ नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत होता है। नियमों के अनुसार, अगर कोई ईएलवी सार्वजनिक जगह पर चलती हुई या खड़ी हुई पाई जाती है तो उसे जब्त कर किसी रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर को सौंप दिया जाता है। इसके साथ इसमें यह भी प्रावधान है कि जब्ती के तीन हफ्ते के भीतर आवेदन किया जाए तो ऐसे वाहनों को छुड़ाया भी जा सकता है।

याचिकाकर्ता के मामले पर गौर करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं जिससे यह साबित हो सके कि अपीलकर्ता ने अपने वाहन को छुड़ाने के लिए अप्लाई किया हो। मुआवजे के लिए अपीलकर्ता को सबूत पेश करने होंगे।

कोर्ट ने कहा 'अपीलकर्ता के मुआवजे की मांग को पूरा करने से पहले ये देखना होगा कि क्या प्रतिवादी ने एंड ऑफ लाइफ व्हीकल को जब्त करने, छोड़ने और स्क्रैप करने से जुड़ी प्रक्रिया कानूनी नियमों के तहत की या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या बाइक को कानूनी तरीके से जब्त किया गया था और क्या अपीलकर्ता द्वारा अंडरटेकिंग न देने की वजह से बाइक को स्क्रैप के लिए भेजा गया था।'

कोर्ट ने कहा 'इस सब बातों की गहराई से जांच रिट याचिका में नहीं की जा सकती इसलिए यह अपील खारिज की जाती है।'

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