पूर्वांचल विचार, साधना और सृजन की भूमि रही है : ओम बिरला

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पूर्वांचल भारत की उस गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने सदियों से पूरे विश्व को दिशा दी है। यहां की धरती केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि विचार, साधना और सृजन की भूमि रही है…

पूर्वांचल विचार, साधना और सृजन की भूमि रही है : ओम बिरला

नई दिल्ली। पूर्वांचल भारत की उस गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने सदियों से पूरे विश्व को दिशा दी है। यहां की धरती केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि विचार, साधना और सृजन की भूमि रही है। उक्त बातें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गांधी दर्शन प्रांगण, राजघाट में पूर्वांचल महोत्सव-9 के सम्मान सत्र को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि कहीं।

बिरला ने कहा कि जब हम पूर्वांचल की बात करते हैं, तो हमें एक ऐसी ऊर्जा का अनुभव होता है, जो समाज के हर क्षेत्र चाहे वह सार्वजनिक जीवन हो, कला हो या सामाजिक सरोकार में दिखाई देती है। यह क्षेत्र अपने भीतर अनगिनत सांस्कृतिक रंगों को समेटे हुए है, जो निरंतर हमारे राष्ट्रीय जीवन को समृद्ध करते हैं। बिरला ने पूर्वांचल की 6 हस्तियों को माटी सम्मान-9 से सम्मानित भी किया। इनमें फैज अहमद किदवई (डायरेक्टर जनरल, डीजीसीए), डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, (कृषि आयुक्त, भारत सरकार), प्रोफेसर वंदना सिंह (कुलपति, वीर बहादुर सिंह पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय, जौनपुर), रवि शंकर राय (संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक सवित्री ग्रुप ऑफ कंपनीज़), राजेश सिंह दयाल (संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक दयाल ग्रुप ऑफ कंपनीज़) तथा श्वेता त्रिपाठी (फिल्म अभिनेत्री) शामिल हैं।

Purwanchal Mahotsav

वरिष्ठ सांसद और माटी के संरक्षक जगदंबिका पाल ने कहा कि सभी पुरस्कार विजेताओं ने राष्ट्र-निर्माण और पूर्वांचल की माटी में अंकुरित बौद्धिक एवं रचनात्मक प्रयासों से राष्ट्र को गौरवान्वित करने का काम किया है और यह सिद्ध किया है कि यदि व्यक्ति के लक्ष्य ऊंचे एवं स्पष्ट हों तथा मन में दृढ़ संकल्प हो तो शिखर तक पहुंचा जा सकता है।

वहीं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष एवं माटी संरक्षक राम बहादुर राय ने कहा कि माटी ने निरंतर स्वयं को सिद्ध किया है। अपने दम पर खड़ी यह संस्था पूर्वांचल की आकांक्षाओं को नए रूप दे रही है। अपने स्वागत वक्तव्य में माटी की योजनाओं का वर्णन करते हुए माटी संयोजक आसिफ आजमी ने कहा कि माटी शीघ्र ही दिल्ली एनसीआर में एक पूर्वांचल सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण करने वाली है।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्र ने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी में एक विशेष शक्ति है, जो व्यक्तित्व को गढ़ती है और उसे व्यापक दृष्टि प्रदान करती है और माटी संस्था उसी मिट्टी से उगने वाला एक छायादार वृक्ष है। उन्होंने कहा कि माटी दिल्ली-एनसीआर में एक पूर्वांचल सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण मिशन पर काम कर रही है, ऐसे में पूर्वांचल वासियों को अधिक से अधिक संख्या में माटी का सहयोगी तथा सारथी बनना चाहिए।

पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि पूर्वांचल की धरती से विचारकों ने समाज को दिशा दी। वीरों ने देश की रक्षा की और संतों ने मानवता का मार्ग प्रशस्त किया। हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी भूमि से यही प्रार्थना की गई है कि वह हमें शक्ति, समृद्धि और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे। पूर्वांचल की यह पावन धरती भी उसी भावना को साकार करती है।

मुख्य अतिथि सांसद राजीव राय ने कहा कि माटी संस्था पूर्वांचल के लोगों को जोड़ने और उसकी कला, संस्कृति और विकास हेतु बड़ी योजनाओं पर काम कर रही है।

संगीत सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व सीईओ नीति आयोग अमिताभ कांत ने कहा कि मुझे विश्वास है कि माटी संस्था समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ एक सशक्त और समृद्ध भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।

महोत्सव का उद्घाटन दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा, पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल आदि के हाथों दीप प्रज्ज्वलन द्वारा हुआ। वहीं कवि सम्मेलन में दिलीप पांडेय, कलीम क़ैसर और हास्य कवि नर कंकाल ने अपनी कविताओं से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। महोत्सव में महेंद्र प्रासाद सिंह द्वारा रचित भोजपुरी हास्य नाटक मास्टर गणेशी राम का मंचन भी किया गया जिसने दर्शकों को खूब लोटपोट किया। कार्यक्रम का समापन सुप्रसिद्ध इंडियन ओशन बैंड की लाइव प्रस्तुति से हुआ।

कार्यक्रम में वित्त मंत्रालय भारत सरकार के सचिव एम नागाराजू, यीडा के सीईओ आर के सिंह और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन सीएमडी मनोज दुबे की भी उपस्थिति रही। महोत्सव में जहां लोगों ने पुरबिया खान पान पूड़ी-सब्जी, बाटी-चोखा, दाल का दूल्हा, लौंग लता, इमरती आदि का आनंद उठाया वहीं संत कबीर को समर्पित प्रदर्शनी, बनारसी साड़ी, जूट के थैले, ठेकुआ-मालपूआ आदि के स्टॉल्स मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे।

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