मकान का किराया देने का वादा: HC ने पलट दिया फैसला, केजरीवाल को राहत?

Apr 06, 2026 05:36 pm ISTMohit लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मामला दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल द्वारा 29 मार्च, 2020 (कोरोना महामारी के दौरान) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा था।

मकान का किराया देने का वादा: HC ने पलट दिया फैसला, केजरीवाल को राहत?

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सोमवार को सिंगल बेंच के उस फैसले को पलट दिया जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल के प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए वादों को लागू करने का आदेश दिया गया था। सिंगल बेंच ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली तब की दिल्ली सरकार को मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए वादों को पूरा करने के लिए एक पॉलिसी बनाने का आदेश दिया था।

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, डिवीजन बेंच ने कहा है कि मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए वादों को लागू करने का आदेश कोर्ट नहीं दे सकती। जस्टिस सी हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अब इस फैसले में बदलाव किया है। कोर्ट ने कहा ‘तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान को लागू करने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता था।’

क्या है मामला?

यह मामला दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल द्वारा 29 मार्च, 2020 (कोरोना महामारी के दौरान) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी मकान मालिकों से यह अपील की थी कि वे उन किरायेदारों से किराया न मांगें जो गरीब हैं और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। यही नहीं केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक तंगी से जूझ रहे गरीब किरायेदार के किराए का भुगतान करने का भी एलान किया था।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट का रुख किया

जब केजरीवाल सरकार ऐसा नहीं कर सकी तो कोरोना महामारी के बाद आर्थिक तंगी का सामना करने वाले दिहाड़ी मजदूरों सहित याचिकाकर्ताओं के एक समूह ने कोर्ट का रुख किया। इसके बाद जुलाई 2021 में, जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने फैसले को लागू करने योग्य करार दिया था। सिंगल बेंच के इसी फैसले के खिलाफ अपील की गई थी जिसे अब डिवीजन बेंच ने पलट दिया।

'छूट सिर्फ लॉकडाउन पीरियड के लिए ही लागू'

डिवीजन बेंच ने कहा है कि 'इस तरह के वादे जल्दबाजी में लिए गए प्रतीत होते हैं, कोर्ट को यह भी जानकारी नहीं कि ऐसे कदम का आर्थिक या अन्य चीजों पर क्या असर पड़ेगा।' हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि डीडीएमए के 2020 ऑर्डर के तहत किराएदार प्रवासी मजदूरों से किराए नहीं वसूल सकते जो कि लॉकडाउन के दौरान कहीं निकल नहीं सके थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छूट सिर्फ लॉकडाउन पीरियड के लिए ही लागू होगी।

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