कई मंत्रालय में सेक्रेटरी से वर्ल्ड बैंक तक, AC ब्लास्ट में जान गंवाने वाले पूर्व IAS के नाम दर्ज हैं ये बड़ी उपलब्धियां
ईलाज के दौरान पूर्व अधिकारी ने दम तोड़ दिया जबकि बेटा खतरे से बाहर बताया जा रहा है। घर में आग लगने की वजह शुरुआती जांच में एयर कंडीशनर (एसी) के इनडोर यूनिट में हुए ब्लास्ट को माना जा रहा है।

दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके हौज खास में एक घर में आग लगने से 80 वर्षीय रिटायर्ड आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार की मौत हो गई। रिटायर्ड आईएएस का बेटा भी आग की चपेट में आया जिसके बाद दोनों को अस्पताल ले जाया गया।
ईलाज के दौरान पूर्व अधिकारी ने दम तोड़ दिया जबकि बेटा खतरे से बाहर बताया जा रहा है। घर में आग लगने की वजह शुरुआती जांच में एयर कंडीशनर (एसी) के इनडोर यूनिट में हुए ब्लास्ट को माना जा रहा है। हालांकि आग लगने की क्या वजह थी इसका अभी भी पता लगाया जा रहा है। पूर्व आईएएस की इस तरह मौत होने के बाद परिवार में शोक की लहर है।
कई उपलब्धियां हासिल कीं
धनेंद्र कुमार ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल कीं और कई बड़े पदों पर भी रहे। एनडीटीवी के मुताबिक, उन्होंने देश की नौकरशाही और आर्थिक नीति में अहम भूमिका निभाई। धनेंद्र का जन्म 1946 में हुआ था और उन्होंने अपना प्रशासनिक करियर 1968 में शुरू किया था। अपने करियर के दौरान उन्होंने केंद्र और हरियाणा सरकार में अलग-अलग पदों पर काम किया।
कई मंत्रालयों में लंबा प्रशासनिक अनुभव
करियर की शुरुआत में वे हरियाणा के करनाल और जींद जैसे जिलों के डिप्टी कमिश्नर पद पर रहे। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों में लंबा प्रशासनिक अनुभव लिया। इस दौरान धनेंद्र कुमार ने केंद्र के कई मंत्रालयों में बतौर सेक्रेटरी भी कई साल अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने देश के प्रतिस्पर्धा कानून और आर्थिक सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में अहम भूमिका निभाई। वे फरवरी 2009 से जून 2011 तक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के पहले चेयरमैन थे। यही नहीं धनेंद्र कुमार इंटरनेशनल लेवल पर भी देश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक वर्ल्ड बैंक में भारत, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर भी काम किया था।
घटना पर क्या बोली पड़ोसी?
पूर्व आईएस के घर के पास ही रहने वाली एक महिला ने कहा कि दमकलकर्मी समय पर नहीं पहुंचे। पड़ोसी महिला का कहना है कि अगर एक वीआईपी को 25 मिनट बाद मदद मिली तो आम जनता का क्या होगा। महिला ने कहा 'दमकल की गाड़ियां आने में लगभग 20-25 मिनट लग गए और उन्होंने (दमकल) ने बताया कि हमें लोकेशन नहीं मिली और गली पतली थी तो हमने मिस कर दी। वे (पूर्व आईएएस) इतने बड़े पदों पर रहे हैं और उन तक मदद पहुंचने में इतना समय लगा तो इस अत्यधिक आबादी और घूसखोर देश में किसी आम आदमी का तो क्या ही होगा।'
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