आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा का कातिल ताहिर हुसैन सजा सुन रो पड़ा, अदालत से जाते हुए क्या बोला
कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन और अन्य चार दोषियों को आईबी ऑफिसर अंतिक शर्मा के मर्डर केस में उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा पर फैसला सुनते ही ताहिर हुसैन कोर्ट रूम में ही रोने लगा।
निखिल पाठक/नई दिल्ली
साल 2020 दिल्ली दंगा मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को कड़कड़डूमा कोर्ट से झटका मिला है। कोर्ट ने ताहिर को आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है।
कड़कड़डूमा कोर्ट रूम में सजा सुनने के बाद जब ताहिर हुसैन कोर्ट परिसर में मीडिया के सामने आया तो उसने यह भी बता दिया कि वह हाई कोर्ट का रुख करेंगे। कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा के बीच बाहर आए ताहिर ने कहा ‘हम हाई कोर्ट में अपील करेंगे। हाई कोर्ट से इंसाफ मिलेगा देर है अंधेर नहीं।’
ताहिर के अलावा अन्य चार को भी उम्रकैद
आपको बता दें कि कोर्ट ने ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दी जाने वाली सजा पर अपना फैसला 31 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने ताहिर हुसैन के अलावा अन्य को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनने के बाद सभी दोषी रोने लगे तो वहीं कोर्टरूम के बाहर परिवार वाले भी रोने लगे।
दोषी ठहराए जाने पर भी फूट-फूटकर रोया था ताहिर
13 जुलाई को जब कोर्ट ने ताहिर को दोषी ठहराया तो तब भी वह फूट-फूटकर रोने लगा था। मामले में कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को इस हत्याकांड में अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराया था। अपने फैसले में कोर्ट ने यह माना था कि ताहिर हुसैन भारी हथियारों से लैस भीड़ का हिस्सा था, जो हिंदु समुदाय के लोगों के खिलाफ दुर्भावना के साथ दंगा, आगजनी और लूटपाट करने के लिए इकट्ठा हुई थी और हमले में अंकित शर्मा को मौत के घाट उतार दिया गया। कोर्ट ने कहा था कि दोषियों ने जिस तरह से अपराध को अंजाम दिया वह अत्यंत क्रूर तरीका था।
पुलिस ने मौत की सजा की मांग की थी
दिल्ली पुलिस ने मौत की सजा की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने उम्रकैद की सजा दी है। आपको बता दें कि 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भीड़ ने आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा पर हमला कर दिया था, जिनका शव बाद में एक नाले में मिला था।
कोर्ट ने क्यों नहीं सुनाई मौत की सजा?
ताहिर हुसैन के वकील अब्दुल गफ्फार ने बताया 'अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की मांग की थी उसको कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने इसके साथ ही दो बातें कही हैं। पहला यह कि अभियोजन पक्ष ट्रायल के दौरान ये साबित नहीं कर पाया कि जो लोग दोषी पाए गए हैं उन्होंने कोई ओवरएक्ट किया है, उदाहरण के तौर पर उन्होंने कोई हथियार इस्तेमाल किया है। अभियोजन पक्ष सिर्फ यही साबित कर पाया कि वे गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा थे और उसी के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया है। दूसरी बात कोर्ट ने यह पाया कि दोषियों का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इसलिए कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की मौत की सजा को अस्वीकार किया।'


