CJP प्रदर्शन: हिरासत में लिए गए लोग 'छात्र नहीं' हैं! दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा
इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा के पीछे किसी सुनियोजित साजिश और 'बाहरी तत्वों' की भूमिका को लेकर अपनी जांच की रफ्तार को दोगुना कर दिया है।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर हुए हिंसक बवाल और 'चलो संसद' मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने सोमवार शाम को एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। पुलिस का कहना है कि हिंसक झड़प, पथराव और सरकारी गाड़ियों को तोड़ने के आरोप में जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, वे छात्र नहीं हैं।
इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा के पीछे किसी सुनियोजित साजिश और 'बाहरी तत्वों' की भूमिका को लेकर अपनी जांच की रफ्तार को दोगुना कर दिया है।
"वे छात्र बिल्कुल नहीं हैं": पुलिस का बड़ा बयान
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस उग्र प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए 70 से ज्यादा लोगों की जब शुरुआती पड़ताल की गई, तो सामने आया कि उनका किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज से कोई लेना-देना नहीं है।
पुलिस अब हिरासत में लिए गए सभी संदिग्धों की पर्सनल डिटेल, उनके आधार कार्ड और उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की गहनता से वेरिफिकेशन कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने, पुलिस के वाहनों को क्षतिग्रस्त करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कई अलग-अलग FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वीडियो फुटेज और 'टेक्निकल सर्विलांस' से कड़ियां जोड़ रही पुलिस
अधिकारी ने साफ किया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। इसके लिए पुलिस की कई टीमें डिजिटल और मैदानी स्तर पर साक्ष्य जुटा रही हैं।
जांच टीमें जंतर-मंतर और टॉलस्टॉय मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों और मीडिया चैनलों के वीडियो फुटेज को खंगाल रही हैं, ताकि पथराव करने वाले चेहरों की पहचान की जा सके।
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर मौजूद उन तमाम रील्स, लाइव वीडियो और क्लिपों की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है, जिनके जरिए घटनाक्रम के सही क्रम का पता लगाया जा सके और भीड़ को भड़काने वाले 'अदृश्य' चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
दिल्ली पुलिस ने क्या चेतावनी दी?
दिल्ली पुलिस ने चेतावनी देते हुए कहा, "जिन लोगों ने भी कानून हाथ में लिया है, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाई है और सरकारी गाड़ियों को आग के हवाले या डैमेज किया है, उनके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हमारी टीमें तकनीकी सबूतों के आधार पर संदिग्धों को शॉर्टलिस्ट कर रही हैं।"
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि नीट (NEET) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। अनशन पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस ने शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया था, जिसके बाद आज संसद सत्र के पहले दिन उनके समर्थकों ने संसद घेराव की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें 10 से ज्यादा आला पुलिस अफसरों (IPS-DANIPS) समेत 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।
हालांकि, दिन में केंद्र सरकार की तरफ से सीजेपी को बातचीत के लिए बुलाया गया था। केंद्र और आंदोलनकारी सीजेपी के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को संगठन के दो प्रतिनिधियों से बातचीत की और आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों पर आंतरिक चर्चा करेगी। यह बातचीत तब हुई जब हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के अनुसार, यह आश्वासन तब आया जब उसके प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने मंत्री के आवास पर नड्डा से दो घंटे के भीतर दो बार मुलाकात की और कथित परीक्षा अनियमितताओं के आरोप में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।


