यमुना की सफाई पर बड़ा कदम, नजफगढ़ ड्रेन में विदेशी मशीन से काम शुरू, 70% तक घटेगी गंदगी
यमुना नदी की सफाई और दिल्ली की बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने शुक्रवार को नजफगढ़ ड्रेन में अत्याधुनिक विदेशी मशीन तैनात किया है।नजफगढ़ ड्रेन यमुना में जाने वाले कुल प्रदूषण का लगभग 70 प्रतिशत योगदान देता है।

यमुना नदी की सफाई और दिल्ली की बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने शुक्रवार को नजफगढ़ ड्रेन में अत्याधुनिक एम्फीबियन मल्टीपर्पज ड्रेजर 'वॉटरमास्टर' और उसके साथ तीन हॉपर बार्ज को तैनात किया। नजफगढ़ ड्रेन यमुना में जाने वाले कुल प्रदूषण का लगभग 70 प्रतिशत योगदान देता है।
इस उन्नत ड्रेजिंग मशीनरी का शुभारंभ सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति में किया। यह पहल यमुना की सफाई के लिए तकनीक-आधारित बड़े पैमाने पर और निरंतर कार्रवाई की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाती है।
फिनलैंड से मंगाई गई मशीन
फिनलैंड से आयातित यह एम्फीबियन मल्टीपर्पज ड्रेजर एक बहुउपयोगी मशीन है। यह सूखी जमीन से लेकर 6 मीटर गहराई तक पानी में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकती है। यह ड्रेजिंग, रेकिंग, पाइलिंग, गाद (स्लज) हटाने और जलीय खरपतवार व हायसिंथ की सफाई जैसे कई कार्यों के लिए उपयुक्त है। यह नजफगढ़ ड्रेन जैसे जटिल और संकरे जल निकायों के लिए बेहद कारगर साबित होगी।
जमीन और पानी के बीच आवाजाही
इस मशीन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी एम्फीबियन मोबिलिटी है, जिससे यह जमीन और पानी के बीच बिना किसी बाधा के आवाजाही कर सकती है। इसमें चार स्टेबलाइजर, 180 डिग्री तक घूमने वाला लचीला एक्सकेवेटर आर्म और 600 लीटर क्षमता की बैकहो बकेट लगी है। यह ड्रेजर कैटरपिलर एयर-वॉटर रेडिएटर कूल्ड इंजन से संचालित है और इसमें GPS आधारित ट्रैकिंग सिस्टम तथा फ्यूल सेंसर भी लगाया गया है। इससे कार्य में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होती है।
मशीन की कुल लागत 803.78 लाख रुपए
ड्रेजर की स्लज पंपिंग क्षमता 600 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा है तथा यह गाद को 1.5 किलोमीटर तक दूर निकाल सकता है। इस अत्याधुनिक एम्फीबियन ड्रेजर की कुल लागत 803.78 लाख रुपए है। ड्रेजिंग कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए तीन स्व-चालित और स्व-निर्वहन हॉपर बार्ज भी तैनात किए गए हैं। प्रत्येक बार्ज की लागत 1.75 करोड़ रुपए है। ये बार्ज बैकहो ड्रेजिंग, हायसिंथ व तैरते कचरे को हटाने तथा ड्रेज यूटिलिटी क्राफ्ट (DUC) की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। प्रत्येक बार्ज की क्षमता 12 क्यूबिक मीटर है और इन्हें तेज व कुशल मटीरियल हैंडलिंग के लिए डिजाइन किया गया है।
…तो अन्य ड्रेनों में भी ऐसी मशीनें लगाई जाएंगी
इस अवसर पर मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि नजफगढ़ ड्रेन यमुना प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत है। यदि हम यमुना की सफाई को लेकर गंभीर हैं तो इस ड्रेन का उपचार सर्वोत्तम उपलब्ध तकनीक और सतत निगरानी के साथ करना ही होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह एम्फीबियन ड्रेजर वैश्विक स्तर की ड्रेजिंग तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। यदि यह मशीन अपेक्षित प्रदर्शन देती है तो यमुना नदी और उसके अन्य ड्रेनों में भी इसी तरह की उन्नत मशीनें तैनात की जाएंगी।
यमुना के पुनर्जीवन के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी
सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि यमुना की सफाई सिर्फ घोषणाओं से नहीं होगी, बल्कि जमीन पर लगातार और वैज्ञानिक कार्रवाई से ही संभव है। यह कमीशनिंग प्रदूषण नियंत्रण, ड्रेनेज क्षमता बढ़ाने और बाढ़ की रोकथाम के लिए स्थायी समाधान की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस अत्याधुनिक ड्रेजिंग फ्लीट की तैनाती से यमुना के पुनर्जीवन के प्रयासों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही आगामी मानसून से पहले दिल्ली की बाढ़-रोधी तैयारियों को भी बड़ा बल मिलेगा।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
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