Explainer: 128 की स्पीड वाली हवाएं; दिल्ली-NCR में खतरनाक धूल के तूफान के पीछे क्या वजहें?
Delhi Mausam: दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार शाम को आए प्री-मानसून तूफान के दौरान हवा की स्पीड 128 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई। ऐसा मौसम किन वजहों से बना? जानें मौसम विशेषज्ञों की राय...

दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार शाम को आए प्री-मानसून तूफान के दौरान हवा की स्पीड 128 किलोमीटर प्रति घंटा तक मापी गई। पालम एयरपोर्ट पर हवा की स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा तो पूसा में यह 128 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई। इस आंधी तूफान के कारण दिल्ली एयरपोर्ट से 2 फ्लाइटों को डायवर्ट करना पड़ा जबकि 400 से अधिक उड़ानों में देरी हुई। बुधवार को सुबह दिल्ली एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में पेड़ गिरे पाए गए। दिल्ली के हौज खास, डिफेंस कॉलोनी, पंचशील पार्क और वसंत कुंज जैसे इलाकों में सबसे अधिक असर देखा गया। ऐसी मौसमी परिस्थिति किन वजहों से पैदा हुई? इस पर क्या है मौसम विशेषज्ञों की राय...
इन दो वजहों ने निभाया रोल
मौसम विज्ञानियों की मानें तो मंगलवार को आए धूल भरे तूफानी मौसम के पीछे 2 वजहें रहीं। पहली भीषण गर्मी और दूसरी नम हवाएं जो साइक्लोनिक सर्कुलेशन से आईं। अधिकतम तापमान के लगातार बढ़ते रहने से धरती की सतही हवा वायुमंडल की तुलना में तेजी से गर्म हुई। इस दिन अधिकतम तापमान 43.5°C था जो सामान्य से 4 डिग्री अधिक था। यह जून में सीजन का सबसे अधिक तापमान था। ज्यादा तापमान के कारण सतह की हवा अधिक गर्म हुई जबकि ऊंचाई पर वायुमंडल ठंडा था।
वायुमंडल के ठंडा होने और सतह के गर्म होने से बिगड़ते हैं हालात
सतह की हवा जैसे-जैसे ऊपर जाती है उसकी रफ्तार बढ़ती जाती है। इस ऊर्जा को CAPE कहते हैं। CAPE बताता है कि वायुमंडल में कितनी तूफानी शक्ति जमा हो गई है। CAPE वह ऊर्जा है जो ऊपर उठने वाली गर्म हवा को ताकत देती है। यह ऊपर उठ रही गर्म हवा के लिए एक फ्यूल की तरह काम करती है। इस मौसमी परिस्थिति को भयावह रूप लेने के लिए 'लैप्स रेट' ने आग में घी का काम किया। 'लैप्स रेट' यानी ऊंचाई के साथ तापमान में गिरावट की दर या स्थिति...
गर्म सतह के कारण पैदा होती है अस्थिरता
'लैप्स रेट' यानी सतह और आसमान के बीच तापमान का फर्क जितना ज्यादा होता है वायुमंडल उतना ही अस्थिर हो जाता है। इससे गर्म हवा हल्की होने के कारण ऊपर उठती है। मई 2018 में दिल्ली में आए ऐसे ही प्री-मानसून धूल भरे तूफान पर एक अध्ययन किया गया था। इसमें पाया गया कि तब CAPE की वैल्यू 2,696 जूल प्रति किलोग्राम थी जबकि लिफ्टेड इंडेक्स -8.98 दर्ज किया गया था। इन दोनों के कंबिनेश से तूफानी स्थितियां बनती हैं।
तूफान रोकता है यह फैक्टर
हालांकि मौसम विशेषज्ञों यह भी बताते हैं कि बहुत ज्यादा CAPE होने पर भी तूफान जैसी परिस्थिति बन जाए इसकी गारंटी नहीं रहती है। इसे रोकने के पीछे भी एक फैक्टर काम करता है जिसे CIN यानी कन्वेक्टिव इनहिबिशन कहते हैं। यह एक ढक्कन की तरह काम करता है जिससे आंधी तूफान जैसी अस्थिरता नहीं बनने पाती। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि CAPE और CIN एक दूसरे के उलट काम करते हैं।
इस वजह से भी बना तूफानी मौसम
इंडिया मेट स्काई (IndiaMetSky) के मौसम विशेषज्ञ ऐश्वर्य तिवारी की मानें तो मंगलवार तक सतह की गर्मी ने CIN यानी कन्वेक्टिव इनहिबिशन की इस रुकावट को धीरे-धीरे खत्म कर दिया था। दोपहर तक तो आते आते यह मौसमी रुकावट पूरी तरह खत्म हो गई थी। यही वजह रही कि कल यानी मंगलवार को तेज धूल भरी आंधी या तूफान ने दिल्ली एनसीआर को झकझोर दिया।
एक ट्रफ ने भी निभाया रोल
मौसम विशेषज्ञों की मानें तो तूफानी मौसम बनने के पीछे दूसरी वजह के तौर पर नमी भी काम करती है। इस नमी का काम पाकिस्तान की तरफ के साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने पूरा कर दिया। इस तरह सतह पर एक ट्रफ यानी कम दबाव वाला एक गलियारा बना जो राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से गुजरता है। इसने एक फनल की तरह काम किया। इसने नम हवा को ऊपर की ओर जा रही गर्म हवा के कॉलम तक पहुंचाने का काम किया। इस तरह भीषण गर्मी और नमी ने अस्थिरता पैदा की। नतीजतन दिल्ली में खतरनाक धूल भरा तूफान बना।
यह असामान्य घटना नहीं, 4 फैक्टर ने निभाया रोल
IMD के डायरेक्टर जनरल एम. महापात्रा की मानें तो मॉनसून से पहले ऐसे धूल भरे तूफान आना कोई असामान्य घटना नहीं है। इनकी तीव्रता वातावरण में बनने वाली अस्थिरता पर निर्भर करती है। ऐसे तूफानों के प्रकार और उनकी तीव्रता चार कारक निर्धारित करते हैं। पहला है भीषण गर्मी जो दिल्ली एनसीआर में देखी जा रही थी। दूसरा है नमी और तीसरा है फैक्टर है अस्थिर वातावरण… चौथा फैक्टर वेदर सिस्टम बनता है।
साइक्लोनिक सर्कुलेशन का भी अहम रोल
मंगलवार की घटना की मुख्य बात कुछ ऐसी थी जिसकी उम्मीद आम तौर पर नहीं की जाती है। इस मामले में साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे सिस्टम में यदि पर्याप्त नमी हो तो अच्छी बारिश देखी जाती है लेकिन आमतौर पर उत्तर-पश्चिम भारत में हमें कम नमी वाले तूफान ही देखने को मिलते हैं। मंगलवार शाम को एक तूफान सिस्टम तेजी से बना। इसने सतह की गर्म और नमी वाली हवा को तेजी से ऊपर खींचा। नतीजतन कल दिल्ली के साथ ही एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में धूल भरी तूफानी हवाएं चलीं।
दस्तक देगा पश्चिमी विक्षोभ, आंधी बारिश की चेतावनी
इस बीच मौसम विभाग ने एक और पश्चिमी विक्षोभ के उत्तरी-पश्चिमी भारत को प्रभावित करने की संभावना जताई है। इस पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 11 और 12 जून को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है। कुछ जगहों पर हवा की गति बढ़कर 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। अलग-अलग जगहों पर हल्की बारिश या ओले गिरने की भी चेतावनी दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में ऑरेंज अलर्ट
खासतौर पर दिल्ली एनसीआर में 11 जून को तेज आंधी और गरज चमक के साथ बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 11 से 13 जून को भी दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में धूलभरी आंधी चल सकती है। वहीं मध्य भारत के राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी इस दौरान गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। कुछ जगहों पर ओले भी गिर सकते हैं। अगले तीन से चार दिनों के भीतर मॉनसून के भी अलग-अलग राज्यों में आगे बढ़ने की संभावना जताई गई है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
संक्षिप्त विवरण
कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
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शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।
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