
पानी की गुणवत्ता जांच में दिल्ली फिसड्डी, 8% से कम सरकारी लैब्स को मिली NABL मान्यता
दिल्ली में जल गुणवत्ता जांचने वाली 25 से अधिक सरकारी लैब्स में से केवल 8% के पास ही NABL मान्यता है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है और राजधानी के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
राजधानी दिल्ली में पानी की गुणवत्ता जांच करने वाली सरकारी लैब्स की हालत बेहद चिंताजनक है। जहां पूरे देश में जल जीवन मिशन के तहत पानी जांच लैब्स को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने की मुहिम चल रही है, वहीं दिल्ली सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे पीछे है।
सिर्फ 8% से कम लैब्स ही मान्यता प्राप्त
टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार के अधीन 25 से ज्यादा सार्वजनिक पानी और वेस्टवाटर जांच लैब्स हैं, लेकिन इनमें से केवल दो को ही NABL (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज) की मान्यता मिली हुई है। वो भी दिल्ली जल बोर्ड के हैदरपुर और वजीराबाद जोनल लैब्स को। बाकी दिल्ली जल बोर्ड लैब्स की मान्यता अक्टूबर में खत्म हो चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात ये कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की वो मुख्य लैब, जो यमुना नदी के पानी की मासिक जांच करती है और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) पर निर्भर रहती है, वो भी NABL मान्यता से वंचित है।
NABL मान्यता क्यों जरूरी?
NABL एक स्वायत्त संस्था है जो सुनिश्चित करती है कि लैब्स के टेस्ट रिजल्ट वैश्विक स्तर के सटीक और विश्वसनीय हों। बिना इस मान्यता के रिपोर्ट्स को कोर्ट या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मान्य नहीं मानतीं। मतलब, वो बस कागज का टुकड़ा भर रह जाती हैं।
अन्य राज्यों का क्या हाल?
जल शक्ति मंत्रालय के दिसंबर दस्तावेज के मुताबिक तमिलनाडु, त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड में 100% सार्वजनिक लैब्स मान्यता प्राप्त हैं। वहीं हरियाणा में 98%, असम में 94%, उत्तर प्रदेश में 66% लैब्स को मान्यता है। अंडमान-निकोबार में 11 में से सिर्फ एक को मान्यता मिली है। लेकिन दिल्ली का आंकड़ा 8% से भी कम है। देशभर में जल जीवन मिशन के तहत करीब 2,847 पानी जांच लैब्स हैं, जिनमें से 59% (1,678) NABL मान्यता प्राप्त हैं। दिल्ली इसमें फिसड्डी साबित हो रही है।
स्वास्थ्य पर गहरा असर
इस साल दिल्ली में हैजा के मामलों में तेज उछाल देखा गया। दूषित पानी और अपशिष्ट से जुड़ी समस्याओं ने लोगों की सेहत को खतरे में डाल दिया है। पुरानी पाइपलाइनें, औद्योगिक कचरा और प्रदूषण – ये सब पानी की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं।
एक पर्यावरण कार्यकर्ता पंकज कुमार (टीम अर्थ वॉरियर) कहते हैं, "राजधानी के लिए ये राष्ट्रीय शर्म की बात है। बिना NABL के टेस्ट रिपोर्ट्स बेकार हैं। यमुना और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की सही निगरानी नहीं हो रही।"
आरटीआई से मिले डेटा में खुलासा हुआ कि जून 2025 में 37 STP प्लांट्स में से ज्यादातर मानकों पर खरे नहीं उतरे। ये फैकल कोलीफॉर्म, BOD, TSS जैसे पैरामीटर में फेल रहे। लेकिन DPCC के डेटा में सब फिट दिखाया गया। ये अंतर सवाल उठाता है कि जांच कितनी भरोसेमंद है?
उम्मीद की किरण?
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड ने कुछ लैब्स के लिए NABL आवेदन किया है। DPCC से इस पर कोई जवाब नहीं मिला। उम्मीद है कि जल्द सुधार होंगे, वरना राजधानीवासियों का स्वास्थ्य खतरे में रहेगा।





