
दिल्ली में हर 3 में से 1 व्यक्ति पानी के टैंकरों पर निर्भर, वाटर ऑडिट में क्या-क्या खुलासे
दिल्ली की 12 बस्तियों में 500 से ज्यादा घरों पर किए गए एक सर्वे में पता चला है कि तीन में से एक व्यक्ति प्राइवेट वाटर सप्लायर्स पर निर्भर है। साथ ही लगभग इतने ही लोग दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के टैंकरों पर निर्भर हैं, जो हफ्ते में मुश्किल से एक या दो बार आते हैं।
दिल्ली की 12 बस्तियों में 500 से ज्यादा घरों पर किए गए एक सर्वे में पता चला है कि तीन में से एक व्यक्ति प्राइवेट वाटर सप्लायर्स पर निर्भर है। साथ ही लगभग इतने ही लोग दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के टैंकरों पर निर्भर हैं, जो हफ्ते में मुश्किल से एक या दो बार आते हैं। ग्रीनपीस इंडिया द्वारा सोमवार को जारी एक वाटर ऑडिट रिपोर्ट राजधानी की जल आपूर्ति में बड़ी असमानताओं को दर्शाती है।

हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक, द रिपोर्ट — वाटर एक्सेस ऑडिट: गैप्स, कॉस्ट एंड बेयॉन्ड— बताती है कि 6000 से 10000 रुपये तक हर महीने कमाने वाले परिवार अपनी इनकम का 15% तक पानी पर खर्च कर देते हैं, जिससे अक्सर भोजन, स्वास्थ्य सेवा या शिक्षा पर खर्च कम हो जाता है।
इलाज और शिक्षा पर भारी खाना-पानी
ग्रीनपीस इंडिया की कैंपेनर वैशाली उपाध्याय ने कहा कि पानी एक बुनियादी अधिकार है, लेकिन इन परिवारों के लिए यह रोजमर्रा का संकट है। उन्होंने कहा कि वाटर एटीएम न होने के कारण, लोग प्राइवेट वाटर सप्लायर्स को प्रति गैलन 15 से 30 का भुगतान करते हैं। गर्मी और लू इस परेशानी को और बढ़ा देती है, जिससे पानी और भोजन, स्कूल की फीस या दवा के बीच चुनाव करना मुश्किल हो जाता है।
इन बस्तियों में हुआ ऑडिट
यह ऑडिट सकूरपुर बस्ती, सावदा घेवरा, दया बस्ती, चूना भट्टी, खजान बस्ती, बीआईडब्ल्यू कॉलोनी, सीमापुरी, सुंदर नगरी, लोहार बस्ती, संगम विहार (कचरा बीनने वालों की बस्ती), रघुबीर नगर जेजे कॉलोनी और कुसुमपुर पहाड़ी सहित कई बस्तियों में किया गया था।
ऑडिट में पाया गया कि सर्वे में हिस्सा लेने वाले 34% लोग प्राइवेट सप्लायर्स पर, 29% डीजेबी टैंकरों पर, 21% वाटर एटीएम पर, 14% सबमर्सिबल पंपों पर और 2% पड़ोसियों से उधार पानी लेकर काम चला रहे हैं। फिर भी, इनमें से अधिकतर सेवाएं अनियमित थीं।
जून तक 3,000 वाटर एटीएम में से केवल 20 लगे
दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2025 तक 3,000 वाटर एटीएम लगाने की घोषणा की थी, लेकिन जून तक केवल 20 ही लगाए जा सके, जबकि सर्वे की गई बस्तियों में एक भी वाटर एटीएम नहीं लगा।
एचटी ने निष्कर्षों पर टिप्पणी के लिए दिल्ली सरकार से संपर्क किया, लेकिन खबर छापे जान तक कोई जवाब नहीं मिला।
सर्वे में हिस्सा लेने वाले लगभग 80% लोगों ने बताया कि पानी की कमी अक्सर या कभी-कभार होती है, खासकर मार्च और जुलाई के बीच। कई परिवार हर महीने पानी पर 500 से 1,500 रुपये तक खर्च करते हैं, जिससे पहले से ही तंगहाल घरेलू बजट और बिगड़ जाता है।
सावदा घेवरा और शकूरपुर जैसे इलाकों में भी, जहां वाटर एटीएम हैं, एक तिहाई से अधिक लोगों ने खराबी और अनियमित सप्लाई की शिकायत की।
रिपोर्ट में तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप का आग्रह किया गया है, तथा सिफारिश की गई है कि सरकार न केवल 3,000 एटीएम के अपने वादे को पूरा करे, बल्कि उसे 2026 तक इन्हें बढ़ाकर 5,000 तक पहुंचाए, तथा सार्वजनिक और आवासीय क्षेत्रों में चौबीसों घंटे एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराए।





