Hindi Newsएनसीआर Newsdelhi vehciles emissions key role in helping pollution cse study latest survey
दिल्ली में वाहनों का धुआं कैसे बना सांस का दुश्मन? पलूशन पर CSE की स्टडी पढ़िए

दिल्ली में वाहनों का धुआं कैसे बना सांस का दुश्मन? पलूशन पर CSE की स्टडी पढ़िए

संक्षेप:

विशेषज्ञों का कहना है कि ये निष्कर्ष स्पष्ट रूप से बताते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के दैनिक उछाल (daily spikes) पर यातायात-संबंधी उत्सर्जन का बहुत गहरा असर होता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के जारी किए गए इस विश्लेषण में कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

Dec 02, 2025 10:41 am ISTUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नासूर बनता जा रहा है। अब इस पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की ओर से की गई एक स्टडी में पता चला है कि सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों का धुआं पलूशन को और मजबूत बना रहा है। दिल्ली-एनसीआर में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी गैसों के स्तर में काफी वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि वाहनों के उत्सर्जन (Traffic Emissions) के कारण हो रही है, जो सर्दियों की उथली सीमा परतों के नीचे फंस जाते हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

विशेषज्ञों का कहना है कि ये निष्कर्ष स्पष्ट रूप से बताते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के दैनिक उछाल (daily spikes) पर यातायात-संबंधी उत्सर्जन का बहुत गहरा असर होता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के जारी किए गए इस विश्लेषण में कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

पीक प्रदूषण: इस शुरुआती सर्दी में अधिकतम प्रदूषण का स्तर (Peak Pollution Levels) पिछले वर्षों की तुलना में कम रहा है।

औसत प्रदूषण: हालांकि, औसत प्रदूषण स्तर में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।

यह अध्ययन 1 अक्टूबर से 15 नवंबर की अवधि को कवर करता है और इसमें पाया गया कि PM2.5 (बारीक कण) का स्तर सुबह (7-10 बजे) और शाम (6-9 बजे) के घंटों के दौरान NO2 के स्तर के साथ लगभग समान रूप से ऊपर-नीचे होता है। यह रुझान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यातायात के उत्सर्जन और भीड़भाड़ (Congestion) का प्रदूषण पर कितना अधिक प्रभाव पड़ता है।

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2): NO2 की उछाल काफी देखी गई। ये उछाल सीधे तौर पर वाहनों के धुएं (vehicular plumes) से जुड़े हुए थे।

PM2.5 (बारीक कण): PM2.5 ने व्यापक (broader) उछाल दिखाया, क्योंकि ये महीन कण अधिक धीरे-धीरे जमा होते हैं और फैलते हैं

CO का स्रोत: CO भी मुख्य रूप से वाहनों से उत्सर्जित होता है।

व्यापक उल्लंघन: इस सर्दी में दिल्ली भर में CO के स्तर में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई।

अध्ययन के 59 दिनों में से 30 से अधिक दिनों में, आधे से अधिक (22) निगरानी स्टेशनों ने आठ घंटे के मानक से ऊपर CO के स्तर को रिकॉर्ड किया। यह लगातार यातायात-संबंधी उत्सर्जन की ओर इशारा करता है। दिल्ली में कुल 40 वायु गुणवत्ता स्टेशन हैं।

द्वारका सेक्टर 8 में CO का स्तर सबसे ख़राब रहा, जहां 55 दिनों तक मानक का उल्लंघन हुआ। इसके बाद जहांगीरपुरी और नॉर्थ कैंपस (DU) रहे, जिनमें से प्रत्येक ने 50 दिन तक उल्लंघन दर्ज किया। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषकों में पाया गया यह समकालिक पैटर्न (synchronised pattern) दर्शाता है कि प्रदूषण के दैनिक कण उछाल को यातायात से उत्पन्न उत्सर्जन द्वारा करीब से बल मिलता है। यह विशेष रूप से ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सरकारी कार्रवाई और जन ध्यान पराली जलाने जैसे अन्य कारकों की ओर अधिक केंद्रित होता दिख रहा है।

CSE में अनुसंधान और पैरवी की कार्यकारी निदेशक, अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा कि प्रदूषकों का यह मिश्रण (cocktail) हवा को सांस लेने के लिए अधिक जहरीला भी बना देता है। फिर भी, हर सर्दी में, प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में धूल नियंत्रण उपायों का बोलबाला रहता है, जबकि वाहनों, उद्योगों, कचरे और ठोस ईंधन जलाने जैसे कारकों पर कमजोर कार्रवाई की जाती है।" अध्ययन में कहा गया है कि इस साल औसत और पीक (अधिकतम) दोनों स्तर पिछले तीन सर्दियों की तुलना में कम हैं। अक्टूबर-नवंबर का PM2.5 औसत पिछले साल की तुलना में लगभग 9% कम है, और सबसे खराब पीक भी थोड़ा कम है।"

सीपीसीबी (CPCB) की वायु प्रयोगशाला के पूर्व प्रमुख, दीपांकर साहा ने कहा कि दिल्ली में वाहन और सड़क पर भीड़भाड़ पूरे साल प्रदूषण के स्रोत बने रहते हैं। सर्दी के महीनों के दौरान प्रतिकूल मौसम संबंधी स्थितियों के कारण इनका प्रभाव और भी बदतर हो जाता है। उन्होंने कहा, "इसकी वजह से विशेष रूप से यातायात चौराहों के आस-पास प्रदूषक जमा हो जाते हैं।" विश्लेषण में कहा गया है कि जहाँ एक ओर दिल्ली अत्यधिक प्रदूषित है, वहीं कई एनसीआर शहरों का प्रदर्शन भी उतना ही खराब या उससे भी बदतर रहा।

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज , धर्म ज्योतिष , एजुकेशन न्यूज़ , राशिफल और पंचांग पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।