
DU के कॉलेजों में सुरक्षा मजबूत करने को बन रही 3 चरण वाली SOP, ये होंगे इंतजाम
Delhi University : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) अपने सभी कॉलेजों में सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने के लिए एक व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रहा है। नए एसओपी का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए स्पष्ट, क्रमबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) अपने सभी कॉलेजों में सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने के लिए एक व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रहा है। हाल के महीनों में विभिन्न संस्थानों में फर्जी धमकी भरे संदेशों और बम की झूठी सूचनाओं की बढ़ती घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सुरक्षा प्रोटोकॉल को और कठोर और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाने पर मजबूर किया है। नए एसओपी का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए स्पष्ट, क्रमबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
डीयू पहले भी एक एसओपी जारी कर चुका है, लेकिन बदलते सुरक्षा माहौल और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए अब अधिक व्यावहारिक और विस्तृत दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय के मुख्य अनुशासन अधिकारी प्रो. मनोज सिंह ने बताया कि यह एसओपी कॉलेज प्रशासन, शिक्षकों, सुरक्षा कर्मियों और छात्रों के लिए एक ऐसी स्पष्ट रूपरेखा तैयार करेगा, जिसे किसी भी धमकी की स्थिति में तुरंत लागू किया जा सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्कूलों में इस तरह की प्रक्रियाएं पहले से लागू हैं और उनका प्रभाव भी सकारात्मक देखा गया है।
सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। इसलिए केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही मीडिया और छात्रों से संवाद करने की अनुमति होगी। गलत सूचना फैलाने पर कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल किया जाएगा। एसओपी लागू करने के साथ सभी कॉलेजों में शिक्षकों, नॉन-टीचिंग स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों को मॉक ड्रिल और आपातकालीन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
तीन चरण बनाए जाएंगे
1. धमकी या संदिग्ध सूचना मिलने पर कॉलेज परिसर को तत्काल खाली कराया जाएगा। निकासी मार्ग और सुरक्षा कर्मियों की भूमिकाएं पहले से निर्धारित होंगी।
2. पुलिस, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड को तुरंत सूचना दी जाएगी। टीमों के पहुंचने तक परिसर को सील किया जाएगा।
3. छात्रों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। कॉलेजों को यह भी निर्देश दिया जाएगा कि नियंत्रित सूचना प्रणाली अपनाकर अभिभावकों को अनावश्यक चिंता में न डाला जाए।





