एक्सीडेंट में घायल युवक को मिलेंगे 1.62 करोड़ रुपए, दिल्ली MACT का बड़ा फैसला
दिल्ली की एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने दुर्घटना में पीड़ित को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने जुलाई 2024 में हुए सड़क हादसे में 53 प्रतिशत अस्थायी दिव्यांगता झेल रहे 21 साल के युवक को 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

दिल्ली की एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने दुर्घटना में पीड़ित को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने जुलाई 2024 में हुए सड़क हादसे में 53 प्रतिशत अस्थायी दिव्यांगता झेल रहे 21 साल के युवक को 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला प्रिसाइडिंग ऑफिसर विक्रम ने सुनाया।
ट्रिब्यूनल के अनुसार, 1 जुलाई 2024 को आर्यन राणा स्कूटी से घर लौट रहे थे, तभी पीछे से तेज और लापरवाही से चल रही एक बस ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में आर्यन को गंभीर चोटें आईं और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले में बस चालक और अन्य प्रतिवादियों ने खुद को झूठा फंसाए जाने का दावा किया था, लेकिन इस संबंध में उन्होंने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। वहीं, बस के कंडक्टर ने गवाह के तौर पर बयान दिया कि दुर्घटना के समय स्कूटी बस से आगे चल रही थी और जब बस ने स्कूटी को ओवरटेक किया, उसी दौरान टक्कर हुई।
6 जनवरी को दिए गए फैसले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि दुर्घटना बस चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हुई, और इसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसकी पूरी जिम्मेदारी भी उसी पर है। ट्रिब्यूनल ने नोट किया कि चिकित्सकीय जांच में याचिकाकर्ता को 53 प्रतिशत अस्थायी दिव्यांगता प्रमाणित की गई है। हादसे के समय आर्यन राणा 21 वर्ष के थे और विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष के छात्र थे। दुर्घटना के बाद वह अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके।
ट्रिब्यूनल ने क्या कहा
इस मामले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि याचिकाकर्ता को जिस प्रकार की दिव्यांगता हुई है, उससे यह स्पष्ट है कि वह आजीविका के लिए काम करने की स्थिति में नहीं रहेंगे। शारीरिक स्थिति में कुछ सुधार संभव है, लेकिन इतना नहीं कि वह कमाई कर सकें। ऐसे में याचिकाकर्ता की कार्यात्मक दिव्यांगता 90 प्रतिशत मानी जाती है। एमएसीटी ने विभिन्न मदों में कुल 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा मंजूर किया, जिसमें भविष्य की आय के नुकसान के लिए 59.36 लाख रुपये शामिल हैं। चूंकि दुर्घटना के समय संबंधित बस बीमित थी, इसलिए ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पूरी मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
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