
दिल्ली में भयानक जाम वाले इलाकों में बनेंगे स्काईवॉक, PWD 6 महीने में करेगा तैयार
दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी ने निगमबोध घाट रिंग रोड और उत्तम नगर ईस्ट मेट्रो स्टेशन के पास 12.29 करोड़ रुपये की लागत से स्काईवॉक और एलिवेटेड पैदल पथ बनाने का ऐलान किया है।
दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने शहर के दो सबसे बदनाम जाम वाले इलाकों में स्काईवॉक और एलिवेटेड पैदल पथ बनाने का ऐलान किया है। पहला निगमबोध घाट के पास रिंग रोड पर और दूसरा उत्तम नगर ईस्ट मेट्रो स्टेशन के आसपास बनेगा। दोनों प्रोजेक्ट की कुल लागत 12.29 करोड़ रुपये है और इन्हें छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
निगमबोध घाट पर रहती है खचाखच भीड़
निगमबोध घाट के पास मारघट वाले बाबा हनुमान मंदिर और श्मशान घाट की वजह से रोज हजारों लोग रिंग रोड पार करते हैं। मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि पूरा इलाका पैदल यात्रियों से पट जाता है। कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन से लोग सीधे पैदल यहां आते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने लंबे समय से स्काईवॉक की मांग की थी।
नया एलिवेटेड पथवे मंदिर के पास बनेगा। इसमें दो बड़ी लिफ्टें होंगी, जो एक बार में 20 लोगों को ले जा सकेंगी। रात के लिए 16 फ्लडलाइट और बारिश-धूप से बचाने के लिए ढलुआ छत वाले पिलर लगाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर 4.31 करोड़ निर्माण और 44.66 लाख रुपये बिजली-लाइटिंग पर खर्च होंगे। इसी इलाके में रिंग रोड, बाईपास और श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग जंक्शन पर भी एक और स्काईवॉक की योजना है।
उत्तम नगर ईस्ट: मेट्रो, बसें और रेहड़ी वालों का कोहराम
उत्तम नगर ईस्ट मेट्रो स्टेशन से पंखा रोड तक का इलाका सुबह-शाम भयानक जाम के लिए मशहूर है। यहां उत्तम नगर बस टर्मिनल से हर दिन दर्जनों रूट की बसें चलती हैं। इसमें आउटर मुद्रिका, बदरपुर बॉर्डर, कापसहेड़ा, निजामुद्दीन, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन समेत कई रूट शामिल हैं। मेट्रो से उतरने वाले हजारों यात्री और सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी वालों की भीड़ मिलकर नजफगढ़ रोड को पूरी तरह जाम कर देती है। फुटपाथ नाममात्र के हैं, इसलिए लोग सड़क पर ही चलते हैं।
अब यहां मेट्रो पिलर 638 से पंखा रोड तक इंटरकनेक्टेड एलिवेटेड पैदल रास्तों का पूरा नेटवर्क बनेगा। इससे पैदल यात्री ऊपर से जाएंगे और सड़क खाली रहेगी। इस प्रोजेक्ट की लागत 7.98 करोड़ रुपये है।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया भर में फुट ओवरब्रिज ज्यादातर फेल रहे हैं। राहगिरी फाउंडेशन की संस्थापक सरिका पांडा भट्ट कहती हैं, 'बुजुर्ग, दिव्यांग, बीमार लोग और सामान ढोने वाले सीढ़ियां चढ़ना पसंद नहीं करते। ज्यादातर लोग ग्राउंड लेवल पर ही सड़क पार करते हैं, इसलिए FOB खाली पड़े रहते हैं और सुनसान होने से असुरक्षित भी हो जाते हैं।'
उनके मुताबिक, 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि अच्छे ट्रैफिक सिग्नल और जेब्रा क्रॉसिंग से दुर्घटनाएं कहीं ज्यादा कम हुईं। दिल्ली जैसे शहर में ये उपाय ज्यादा कारगर और सबके लिए सुविधाजनक हैं।





