
DND से मानेसर वाला एक्सप्रेसवे खुलने वाला है, लेकिन असली मुसीबत इस छोटे रोड में फंसी
दिल्ली में न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, बाटला हाउस जैसे इलाकों में रोज़ाना घंटों जाम लगने की समस्या बनी हुई है, जिसके समाधान के लिए CRRI ने NHAI को DND-मानेसर एक्सप्रेसवे पर एक्सेस रोड जल्द बनाने के लिए सख्त चिट्ठी भेजी है, ताकि लोगों को ट्रैफिक से राहत मिल सके।
राजधानी दिल्ली के कई इलाके रोजाना जाम के झंझट में फंसे रहते हैं। इसमें न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, बाटला हाउस, जाकिर नगर, खिजराबाद, तैमूर नगर और शाहीन बाग जैसे इलाकों के लाखों लोग रोज सुबह-शाम घंटों ट्रैफिक में फंसे रहते हैं। मथुरा रोड और सर सीवी रमन मार्ग पर रोजाना एक लाख से ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं, जिससे पूरे इलाके में भयंकर जाम लग रहा है।
CRRI ने NHAI को सख्त चिट्ठी दी
सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) ने सितंबर में ही नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को चिट्ठी लिखी है। चीफ साइंटिस्ट एस वेलमुरुगन ने साफ कहा – NH-148NA (DND-मानेसर स्पर) का मुख्य एक्सप्रेसवे भले ही बनकर तैयार हो रहा हो, लेकिन बिना एक्सेस रोड के यह इलाके को कोई राहत नहीं देगा। उन्होंने लिखा, 'इन एक्सेस रोड के बनते ही न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, बाटला हाउस, जाकिर नगर, खिज़राबाद और तैमूर नगर से एयरपोर्ट, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, बारापुल्ला एलिवेटेड रोड, नोएडा और फरीदाबाद जाने का सीधा और तेज रास्ता खुल जाएगा।'
लोग सालों से लगा रहे हैं गुहार
न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी RWA के वाइस प्रेसिडेंट राजीव कपूर कहते हैं, 'एलिवेटेड एक्सप्रेसवे हमारे सिर के ऊपर से निकल रहा है, लेकिन नीचे आज भी कच्ची मिट्टी की पटरी है। DND के पुल से बाटला हाउस तक जो पुराना रास्ता है, उसे सिर्फ पक्का कर दिया जाए तो आधा जाम अपने आप खत्म हो जाएगा।'
मुख्य एक्सप्रेसवे का काम अंतिम दौर में
NHAI अधिकारियों ने बताया कि 59 किमी लंबा यह हिस्सा अगले चार महीनों में पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद दिल्ली से गुरुग्राम का सफर 30 मिनट से भी कम समय में पूरा हो सकेगा। 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाला यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का अहम हिस्सा है।
दिल्ली डी-कंजेशन प्लान में अहम भूमिका
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और उसके तीन NCR वाले हिस्सों का मकसद ही यही है कि शहर के अंदर की सड़कों से भारी ट्रैफिक हटाकर बाहरी एक्सप्रेसवे पर डाला जाए। लेकिन इसके लिए लोकल कनेक्टिविटी जरूरी है।'
अब सबकी नजर उन छोटी एक्सेस रोड पर
जब तक NHAI इन सर्विस रोड को प्राथमिकता से पूरा नहीं करता, तब तक ऊपर चमचमाता नया एक्सप्रेसवे देखकर भी नीचे फंसे लोग राहत की सांस नहीं ले पाएंगे।





