नोएडा में श्रमिक हिंसा भड़काने में दिल्ली के छात्रों की भूमिका? पुलिस की जांच में नई बात आई सामने

Aditi Sharma हिन्दुस्तान, लखनऊ/नोएडा
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नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के मामले में नई जानकारी सामने आई है। यूपी एसटीएफ की पड़ताल में हिंसा भड़काने में दिल्ली स्थित एक यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के मामले में नई जानकारी सामने आई है। यूपी एसटीएफ की पड़ताल में हिंसा भड़काने में दिल्ली स्थित एक यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। ऐसा दावा है कि छात्रों ने वॉट्सऐप ग्रुपों के माध्यम से गड़बड़ी की थी। सूत्रों का कहना है कि इन छात्रों की भूमिका सामने आने पर उनकी तलाश शुरू कर दी गई है। एसटीएफ द्वारा जांच के दौरान वॉट्सऐप ग्रुपों पर चलाए गए भड़काऊ संदेशों से जुड़े सबूत भी जुटाए गए हैं। इसके अलावा नोएडा में हुई हिंसा के पीछे षड्यंत्र को लेकर कई बिंदुओं पर गहनता से पड़ताल की जा रही है।

इस बीच वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हिंसा के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए करीब 300 मजदूरों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। जेल प्रशासन का कहना है कि रिहाई का सिलसिला अभी जारी है। शनिवार को भी कुछ मजदूरों को रिहा किया जाएगा।

हजार से ज्यादा मजदूरों को भेजा था जेल

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई कंपनियों में काम करने वाले कुछ मजदूरों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हंगामा, तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की थी। पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग थाना क्षेत्र से करीब 1050 मजदूरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनमें से कुछ आरोपी मजदूरों के खिलाफ शांति भंग की धाराओं में कार्रवाई की गई, जबकि अन्य पर तोड़फोड़ और आगजनी जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं। जेल अधीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि शुक्रवार को शांति भंग की धाराओं में बंद करीब 300 मजदूरों की रिहाई की गई है। शनिवार को अभी ओर भी रिहाई होनी है।

पाकिस्तान से चलाए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट से फैलाई गई अशांति

इससे पहले गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने गुरुवार को कहा था कि कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल भ्रामक जानकारी फैलाने और नोएडा में श्रमिकों के बीच अशांति भड़काने के लिए किया गया।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि बताया कि दो 'एक्स' अकाउंट की तकनीकी जांच से पता चला है कि इन्हें वीपीएन के जरिए पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा था। उन्होंने कहा, मामले की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, 13 अप्रैल को इन खातों के माध्यम से भ्रामक पोस्ट प्रसारित किए गए, जिनका मकसद सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना था।

इन पोस्ट के कारण जिले के विभिन्न हिस्सों में लोगों के बीच भय और आक्रोश फैल गया।पुलिस आयुक्त ने बताया कि इसके बाद भीड़ ने पथराव किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए, और वाहनों, निजी संपत्ति और सार्वजनिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाकर आगजनी और तोड़फोड़ की गई। पुलिस आयुक्त ने बताया कि बुधवार से जिले में स्थिति सामान्य हो गई है और सुबह फ्लैग मार्च किया गया तथा सेक्टर-आधारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत गश्त जारी है।

भाषा से इनपुट

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अदिति शर्मा

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