
अरे गजब! पोर्टल ढूंढ़ ले रहा फोन, दिल्ली पुलिस नहीं पकड़ पा रही चोर
दिल्ली में मोबाइल चोरी और झपटमारी के बढ़ते मामलों के बीच, टेलिकॉम विभाग के CEIR पोर्टल पर दो साल में 8.70 लाख शिकायतें आईं, जबकि पुलिस तकनीकी सीमाओं और लापरवाही के चलते मात्र 13 हजार फोन ही बरामद कर पाई है।
चोरी और झपटे गए मोबाइल फोन का पता लगाने के लिए टेलिकॉम विभाग ने सीईआईआर पोर्टल (सेंट्रल इक्विपमेंट आईडेंटिटी रजिस्टर) बनाया है। इस पर बीते दो साल में दिल्लीवालों द्वारा करीब साढ़े आठ लाख शिकायतें दर्ज कराई गईं। पोर्टल ने साढ़े पांच लाख से ज्यादा मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाकर पुलिस को जानकारी भी दी, लेकिन सिर्फ 13 हजार फोन ही बरामद किए जा सके। पोर्टल से मिली जानकारी और बरामद मोबाइल फोन के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह महज तीन फीसदी ही है।

करीब दो साल में 8.70 लाख शिकायतें : मोबाइल चोरी और झपटमारी के मामलों में दिल्ली देश में सबसे आगे है। सीईआईआर पोर्टल के मुताबिक अब तक दिल्ली के 8,70,341 मोबाइल मालिकों ने अपने चोरी या झपटे गए फोन को ब्लॉक कराने का अनुरोध किया। टेलिकॉम विभाग ने इन मोबाइलों को ब्लॉक कर सर्विलांस पर लगाया, ताकि चालू होने पर उनकी लोकेशन और सिम की जानकारी मिल सके।
पुलिस की दलीलें
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने माना कि मोबाइल ट्रेस होने के बाद अगर उसे दोबारा बंद कर दिया जाए, तो उसे ढूंढना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने तकनीकी सीमाओं का भी हवाला दिया। पुलिस के पास आईएमईआई नंबर ट्रैक करने के लिए कोई सॉफ्टवेयर नहीं है।
बरामद फोन थानों के मालखानों में बंद
सूत्रों के अनुसार, फोन बरामद भी किए गए हैं, उनमें से कई अपने मालिकों तक नहीं पहुंच पाए। ये फोन थानों के मालखानों में पड़े हैं। टेलिकॉम विभाग पुलिस को मोबाइल की लोकेशन, सिम विवरण, एफआईआर नंबर और पीड़ित की पूरी जानकारी भेजता है। फोन मालिकों तक पहुंचना मुश्किल नहीं है, लेकिन लापरवाही रिकवरी को अधूरा बना रही है।
ऐसे करें शिकायत
- www.ceir.gov.in पर जाएं।
- ब्लॉक स्टोलेन/लास्ट विकल्प चुनें।
- आईएमईआई, नाम, एफआईआर और पहचान पत्र अपलोड करें।
- नया मोबाइल नंबर और ईमेल डालें।
- मोबाइल पर आए ओटीपी को भरने के बाद आपका मोबाइल ब्लॉक हो जाएगा।
हर थाने में बनी स्पेशल टीम, फिर भी नतीजे कमजोर
दिल्ली के लगभग हर थाने में चोरी हुए मोबाइल फोन की तलाश के लिए स्पेशल टीमें बनाई गईं हैं। इन टीमों को तकनीकी ज्ञान और बाहरी राज्यों में काम करने की अनुमति भी दी गई है। इसके बावजूद टीमों की सफलता दर बहुत कम है।





