कैंसर मरीजों को नहीं पड़ेंगे भटकने; DSCI में लगेंगे एडवांस रेडियोथेरेपी मशीन, IOCL संग MOU साइन
लिनियर एक्सीलेरेटर की आपूर्ति इसी साल मार्च के अंत तक हो जाएगी। इसके बाद इसका इन्स्टालेशन होगा और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त होने के बाद इसे इसी साल के अंत तक पूर्ण रूप से कार्यशील कर दिया जाएगा।

कैंसर बीमारी के इलाज में मानक स्थापित कर चुके दिल्ली सरकार के दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान (DSCI) ने मरीजों की उन्नत देखभाल और इलाज के लिए एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। DSCI ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर दस्तखत किए हैं। इसके तहत IOCL अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) पहल के जरिए एडवांस रेडियोथेरेपी मशीन स्थापित करेगा। इससे कैंसर रोगियों को रेडिएशन के सिलसिले में दूसरे अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
DSCI ने एक बयान में कहा है कि IOCL के साथ हुए नए समझौते से अस्पताल परिसर में कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक रेडिएशन थेरेपी मशीन, उच्च-ऊर्जा लिनियर एक्सीलेरेटर का इंस्टॉलेशन हो सकेगा। बयान के मुताबिक, लिनियर एक्सीलेरेटर की आपूर्ति इसी साल मार्च के अंत तक हो जाएगी। इसके बाद इसका इन्स्टालेशन होगा और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त होने के बाद इसे इसी साल के अंत तक पूर्ण रूप से कार्यशील कर दिया जाएगा।
यह MOU 21 जनवरी 2026 को दिल्ली सचिवालय में हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव यश चौधरी, DSCI के संयुक्त निदेशक डॉ. रविंदर सिंह और क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा शुक्ला मौजूद थीं। इसके साथ ही आईओसीएल की ओर से कार्यकारी निदेशक (समन्वय एवं सीएसआर) विभूति रंजन प्रधान, उप महाप्रबंधक (सीएसआर) नितिन वशिष्ठ और सीएसआर मैनेजर विनीत अग्रवाल भी मौजूद थे। एचएलएल इन्फ्रा टेक सर्विसेज लिमिटेड (HITES) की ओर से वरिष्ठ सहायक नूर आलम भी उपस्थित थे।
इस मौके पर दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि उच्च-ऊर्जा लिनियर एक्सीलेरेटर की स्थापना दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उन्नत तकनीक हमें अत्यंत सटीक और विश्वस्तरीय रेडिएशन थेरेपी प्रदान करने में सक्षम बनाएगी और मरीजों के उपचार में उल्लेखनीय सुधार लाएगी। उन्होंने इसके लिए IOCL के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि यह उच्च-स्तरीय मशीन संस्थान की उन्नत, सटीक एवं मरीज-केंद्रित कैंसर उपचार प्रदान करने की क्षमता को और मजबूत करेगी, जिससे प्रतिवर्ष हजारों मरीज लाभान्वित होंगे।
डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कहा, “यह एक उत्कृष्ट पहल है, जो सरकार के सहयोग से संभव हो पाई है और हम इसका पूर्ण उपयोग समाज के सबसे गरीब कैंसर मरीजों को अनुशंसित उपचार उपलब्ध कराने के लिए करेंगे। विभूति रंजन प्रधान ने आश्वासन दिया है कि इस लिनियर एक्सीलेरेटर के कार्यशील होने के बाद भविष्य में और सहयोग प्रदान किया जाएगा।” डॉ. रविंदर सिंह, संयुक्त निदेशक, डीएससीआई ने आगे कहा कि “डीएससीआई, आईओसीएल की सामाजिक दायित्व एवं स्वास्थ्य सेवा विकास के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करता है। इस उच्च-स्तरीय लिनियर एक्सीलेरेटर के जुड़ने से न केवल मरीजों की प्रतीक्षा अवधि में कमी आएगी, बल्कि सुरक्षित, प्रभावी एवं साक्ष्य-आधारित रेडियोथेरेपी प्रदान करने की हमारी क्षमता भी सुदृढ़ होगी। सार्वजनिक संस्थानों और जिम्मेदार कॉर्पोरेट संगठनों के बीच इस प्रकार की साझेदारियां देश में कैंसर देखभाल के परिणामों में सुधार के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।”
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Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


