
दिल्ली की विशेष अदालतों का दायरा बढ़ा, अब पूर्व सांसद-विधायक भी आएंगे रडार पर
दिल्ली के उपराज्यपाल ने राउज एवेन्यू कोर्ट की तीन विशेष अदालतों का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे अब ये अदालतें न केवल मौजूदा, बल्कि पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ भी बाल अधिकारों के उल्लंघन और पॉक्सो अधिनियम के तहत यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी, जिससे कानूनी जवाबदेही मजबूत होगी।
दिल्ली में कानून का शिकंजा अब और सख्त होने जा रहा है। राजधानी की तीन विशेष अदालतें, जो पहले केवल मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ बाल अधिकारों और यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करती थीं, अब पूर्व सांसदों और विधायकों को भी अपने दायरे में लाएंगी। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के कार्यालय ने बुधवार को इसकी घोषणा की, जिसने कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है।

विशेष अदालतों का नया रोल
राउज एवेन्यू कोर्ट में स्थित ये तीन विशेष अदालतें बाल संरक्षण अधिकार आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई थीं। अब दिल्ली सरकार के प्रस्ताव को एलजी की मंजूरी मिलने के बाद इन अदालतों का दायरा बढ़ गया है। यानी, अब चाहे मौजूदा नेता हों या रिटायर्ड, अगर उन पर बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन या यौन अपराध से जुड़ा कोई आरोप है, तो इन अदालतों में उनकी जवाबदेही तय होगी।
एलजी कार्यालय के बयान के मुताबिक, इन तीन अदालतों को जुलाई 2023 में सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों के लिए बनाया गया था। यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के 2020 के निर्देश के बाद लिया गया था। लेकिन, पिछली केजरीवाल सरकार ने इस अधिसूचना को तीन साल से ज्यादा समय तक लटकाए रखा। अब जाकर इस दिशा में कदम उठाया गया है, जिसे कानूनी विशेषज्ञ एक बड़ा बदलाव मान रहे हैं।
और मजबूत होगा कानूनी ढांचा
दिल्ली में पहले से ही आठ अन्य अदालतें बच्चों के खिलाफ अपराधों, बाल अधिकारों के उल्लंघन और पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों की सुनवाई कर रही हैं। इन तीन नई विशेष अदालतों के दायरे के विस्तार से न केवल मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी, बल्कि नेताओं चाहे वे मौजूदा हों या पूर्व के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत करेगा।
क्यों है यह खबर अहम?
यह बदलाव न सिर्फ कानूनी व्यवस्था को और पारदर्शी बनाएगा, बल्कि यह भी संदेश देगा कि कानून के सामने कोई भी अछूता नहीं है। चाहे आप सत्ता के शीर्ष पर हों या रिटायर होकर घर बैठे हों, बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में अब कोई रियायत नहीं मिलेगी। यह कदम दिल्ली की कानूनी व्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है, जिसकी नजरें अब हर उस नेता पर होंगी जो कानून की सीमा लांघेगा।





