दिल्ली की 700 से अधिक झुग्गी-बस्तियों का होगा पुनर्विकास, 5Km के भीतर बसाने की तैयारी: केंद्रीय मंत्री

Feb 17, 2026 02:47 pm ISTRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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राजधानी दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी (JJ) बस्तियों के पुनर्विकास की प्रक्रिया तेज होने के संकेत मिले हैं। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि दिल्ली की झुग्गी बस्तियों को या तो उसी स्थान पर या फिर 5 किलोमीटर के दायरे में पुनर्विकसित किया जाएगा।

दिल्ली की 700 से अधिक झुग्गी-बस्तियों का होगा पुनर्विकास, 5Km के भीतर बसाने की तैयारी: केंद्रीय मंत्री

राजधानी दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी (JJ) बस्तियों के पुनर्विकास की प्रक्रिया तेज होने के संकेत मिले हैं। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि दिल्ली की झुग्गी बस्तियों को या तो उसी स्थान पर या फिर 5 किलोमीटर के दायरे में पुनर्विकसित किया जाएगा।

कौन निभाएगा अहम भूमिका?

उन्होंने यह बयान रियल एस्टेट उद्योग संगठन NAREDCO के एक सम्मेलन में दिया। मंत्री ने कहा कि दिल्ली में लगभग 700 से 750 झुग्गी-झोपड़ी कॉलोनियां हैं और इनके पुनर्विकास को लेकर पिछले तीन महीनों में कई उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। इस प्रक्रिया में भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) और Delhi Development Authority (DDA) अहम भूमिका निभाएंगे।

सरकार का लक्ष्य- लोगों को मिले पक्का घर

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मंत्री के अनुसार, पुनर्विकास की योजना पर नीति-स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इन बस्तियों के निवासियों को पक्का घर उपलब्ध कराया जाए, जिससे किफायती आवास को भी बढ़ावा मिलेगा।

दिल्ली में कुल 675 झुग्गी बस्तियां

दिल्ली में कुल 675 झुग्गी बस्तियां दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के अंतर्गत आती हैं। इनमें से 376 बस्तियां सरकारी जमीन पर हैं और DDA के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, जबकि 299 बस्तियां DUSIB के अधीन हैं। वर्ष 2007 की DDA स्लम पुनर्वास नीति में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत पुनर्विकास का प्रावधान है, लेकिन अब तक इसका क्रियान्वयन धीमा रहा है। वर्ष 2022 में छह परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए गए थे, परंतु कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।

पिछली योजना अब तक सफल नहीं हुई

इससे पहले वर्ष 2015 की दिल्ली स्लम एवं झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति में भी इन-सीटू पुनर्वास या 5 किमी के भीतर वैकल्पिक आवास का प्रावधान किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, पिछली योजनाएं वित्तीय व्यवहार्यता की कमी के कारण सफल नहीं हो पाईं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अब नए सिरे से टेंडर जारी करने की तैयारी है। योजना के तहत आसपास की छोटी-छोटी झुग्गी बस्तियों को एक साथ विकसित कर मिश्रित भूमि उपयोग (रेजिडेंशियल और कमर्शियल) की अनुमति देने पर भी विचार हो रहा है। सरकार का कहना है कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर नागरिक को पक्का घर देने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में अहम कदम होगी।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta

रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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