दिल्ली में स्कूल के लिए एक रुपये में मिली जमीन पर करोड़ों का कर्ज लिया, चुकाया भी नहीं
लीज नियम के अनुसार स्कूल को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से अनुमति के बाद ऋण लेने की इजाजत है। हालांकि, इस स्कूल ने निदेशालय से इजाजत नहीं ली। स्कूल सोसायटी ने ऋण का भुगतान भी नहीं किया।

एक रुपये की सालाना लीज पर स्कूल के नाम पर ली गई जमीन को बैंक में गिरवी रखने का मुद्दा सोमवार को हाईकोर्ट में फिर उठा। कोर्ट ने इस मामले में स्कूल सोसायटी, ऋण देने वाले बैंक, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा स्कूल की जमीन को कारोबार बना दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने इस मामले को सरकारी महकमों का लचर रवैया बताया। पीठ ने कहा कि स्कूल के लिए सस्ते दाम पर दी गई जमीन को बगैर शिक्षा निदेशालय की अनुमति के गिरवी कैसे रखा जा सकता है? पीठ ने यह भी कहा कि डीडीए को लीज की जमीन को सशर्त गिरवी रखने के लिए पूर्व की नीति को बदलने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वहीं, डीडीए की तरफ से दाखिल जवाब में कहा गया है कि स्कूल की जमीन का किसी और मकसद से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
हालांकि, लीज नियम के अनुसार स्कूल को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से अनुमति के बाद ऋण लेने की इजाजत है। हालांकि, इस स्कूल ने निदेशालय से इजाजत नहीं ली। स्कूल सोसायटी ने ऋण का भुगतान भी नहीं किया। जिसके चलते बैंक इस जमीन की नीलामी की प्रक्रिया की ओर अग्रसर है। वहीं, ऋण देने वाले बैंक की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि उन्होंने नीलामी प्रक्रिया रोक दी है। पीठ ने मामले में ऋण वसूली अधिकरण को भी पक्षकार बनाने को कहा है।
क्या है मामला
दक्षिणी दिल्ली के एक बड़े निजी स्कूल ने वर्ष 1988 में डीडीए से सालाना एक रुपये की लीज पर चार एकड़ जमीन ली थी। स्कूल सोसायटी ने इस जमीन को गिरवी रखकर दो करोड़ 20 लाख 32 हजार 638 रुपये का ऋण बैंक से ले लिया। डेढ़ दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद ऋण का भुगतान न होने पर बैंक ने नीलामी की प्रक्रिया शुरू की।
शिक्षा निदेशालय ने भी नहीं की कार्रवाई
इस मामले में शिक्षा निदेशालय ने तीन साल पहले पीठ को आश्वासन दिया था कि वह स्कूल को निदेशालय के अंतर्गत लेगा। हालांकि, अभी तक निदेशालय ने स्कूल सोसायटी से जमीन का कब्जा नहीं लिया। इस पर भी पीठ ने नाराजगी जाहिर की।
रकम का निजी जरूरतों में इस्तेमाल किया गया
जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है। दिल्ली के तकरीबन 37 और निजी स्कूल सोसायटी हैं, जिन्होंने लीज की जमीन को गिरवी रखकर मोटी रकम बैंकों से ऋण पर ली है। रकम का इस्तेमाल निजी जरूरतों के लिए किया गया।
दिल्ली में लोग मकान बनाकर रहने लगे
शिक्षा निदेशालय ने पूर्व में हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में माना था कि 176 निजी स्कूलों का निरीक्षण करने पर पाया गया कि इनके नाम पर सस्ती दरों पर ली गई जमीन पर लोग मकान बनाकर रह रहे हैं। उस समय भी निदेशालय ने कोर्ट को आश्वस्त किया था कि वह इन जमीनों पर कब्जा लेगा।
निजी अस्पताल की जमीन का गलत इस्तेमाल हुआ
सर गंगाराम अस्पताल, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट सहित 51 अस्पतालों को सुप्रीम कोर्ट ने तीन मार्च को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि शर्त के अनुसार सस्ती दरों पर जमीन लेने के बाद भी इन अस्पतालों ने मुफ्त इलाज नहीं दिया है।
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
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