फोन कर बताई लोकेशन तब बची जान, दिल्ली बिल्डिंग हादसे में मोबाइल कैसे बने उम्मीद की डोर?
दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरने से कई छात्र मलबे में दब गए। मलबे में दबे एक छात्र नीरज बावा ने मोबाइल से दोस्त विकास को कॉल कर मदद मांगी। कड़ी मशक्कत के बाद नीरज को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।

राजन शर्मा, नई दिल्ली
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने के बाद मलबे में दबे कई छात्र जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। चारों तरफ टूटे कंक्रीट और सरियों के बीच फंसे छात्रों के लिए मोबाइल फोन अपनों तक पहुंचने का आखिरी सहारा बन गए। रविवार देर शाम तक कई छात्र अपने दोस्तों और परिचितों को फोन कर बचाने की गुहार लगाते रहे। इन्हीं में एक छात्र नीरज बावा भी था, जिसकी एक फोन कॉल उसके लिए जिंदगी की डोर साबित हुई।
मलबे में दबे नीरज ने दोस्त को दी फोन पर जानकारी
नीरज हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर रहता था और मोतीलाल नेहरू कॉलेज में सेकेंड ईयर का छात्र है। वह मूल रूप से जम्मू का रहने वाला है और करीब डेढ़ साल से सत्य निकेतन में रह रहा था। हादसे के बाद जब उसे होश आया तो उसका मोबाइल फोन उसके पास ही था। मलबे में दबे होने के बावजूद उसने अपने दोस्त विकास को फोन कर हादसे की जानकारी दी और मदद पहुंचाने की गुहार लगाई।
मित्र ने नहीं की देर, फौरान पहुंचा सत्य निकेतन
विकास राम लाल आनंद कॉलेज का छात्र और छात्रसंघ का पूर्व अध्यक्ष रह चुका है। उसने बताया कि नीरज का फोन आने के समय वह घर पर था। हादसे की जानकारी मिलते ही वह तुरंत सत्य निकेतन पहुंचा और वहां मौजूद लोगों तथा राहत कार्य में जुटी टीमों को नीरज के मलबे में दबे होने की जानकारी दी। इसके बाद राहतकर्मियों ने नीरज की तलाश तेज कर दी।
कड़ी मशक्कत के बाद बचाया गया नीरज
काफी मशक्कत के बाद देर शाम नीरज को मलबे से बाहर निकाल लिया गया। वह गंभीर रूप से घायल है, लेकिन समय रहते राहतकर्मियों तक उसकी जानकारी पहुंचने से उसकी जान बच गई।
वायरल हुए मदद की गुहार के वीडियो
हादसे के बाद मलबे में दबे कुछ छात्रों ने घायल अवस्था में अपने मोबाइल फोन से वीडियो भी बनाए। बताया जा रहा है कि इनमें से कई वीडियो दोस्तों और परिचितों को भेजे गए, जबकि कुछ सोशल मीडिया पर भी सामने आए। देखते ही देखते ये वीडियो वायरल हो गए।
मलबे में फंसे दिखे छात्र
वीडियो में घायल छात्र मलबे के बीच फंसे दिखाई दे रहे हैं और मदद पहुंचाने की अपील कर रहे हैं। हादसे के बाद सामने आए ये दृश्य उस भयावह मंजर की तस्वीर पेश कर रहे हैं, जिसमें कई छात्र टूटे हुए हॉस्टल के नीचे घंटों तक मदद का इंतजार करते रहे। राहत अभियान के दौरान हर फोन कॉल और हर सूचना मलबे में दबे लोगों तक पहुंचने के लिए अहम साबित हो रही थी।


