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देश की संप्रभुता पर हमला थे 2020 के दिल्ली दंगे, SC में क्या बोली दिल्ली पुलिस?

देश की संप्रभुता पर हमला थे 2020 के दिल्ली दंगे, SC में क्या बोली दिल्ली पुलिस?

संक्षेप: दिल्ली पुलिस ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह स्वतः स्फूर्त दंगा नहीं था वरन राष्ट्र की संप्रभुता पर एक हमला था। 

Tue, 18 Nov 2025 04:34 PMKrishna Bihari Singh भाषा, नई दिल्ली
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साल 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह स्वतः स्फूर्त दंगा नहीं था वरन राष्ट्र की संप्रभुता पर एक हमला था। दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं।

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च अदालत की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ को बताया कि समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश की गई थी। तुषार मेहता ने कहा कि यह कोई संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के खिलाफ आंदोलन नहीं था। यह सुनियोजित और पूर्व-नियोजित दंगा था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सबसे पहले उस मिथक को तोड़ना होगा कि यह अपने आप हुआ। यह कोई स्वतः स्फूर्त दंगा नहीं था। यह एक सुनियोजित और पूर्व-नियोजित दंगा था। जमा किए गए सबूतों से पता चलेगा कि किस तरह भाषण के बाद भाषण, बयान के बाद बयान, समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश गई थी।

तुषार मेहता ने कहा कि यह किसी कानून के खिलाफ आंदोलन नहीं था। शरजील इमाम ने कहा था कि उसकी दिली ख्वाहिश है कि हर उस शहर में 'चक्का जाम' हो जहां मुसलमान रहते हैं। सोशल मीडिया पर माहौल बनाया गया कि युवाओं के साथ कुछ बहुत गंभीर होने जा रहा है। रही बात मुकदमे में देरी की तो इसके लिए आरोपी खुद जिम्मेदार हैं।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने भी दलीलें दीं। बता दें कि खालिद, इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और रहमान के खिलाफ फरवरी 2020 के दंगों के कथित ‘मास्टरमाइंड’ होने के आरोप में आतंकवाद रोधी कानून और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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बता दें कि फरवरी 2020 में दिल्ली में भड़के दंगों में 53 लोग मारे गए थे जबकि 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। राष्ट्रीय राजधानी में कथित तौर पर संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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