10 महीने बहुत कम, दिल्ली में पलूशन कंट्रोल के लिए मनोज तिवारी ने कितना टाइम मांगा

Jan 03, 2026 04:32 pm ISTSubodh Kumar Mishra भाषा, नई दिल्ली
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दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण में सरकार के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए 10 महीने का समय बहुत कम है। इस समस्या को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए कम से कम दो साल का समय दिया जाना चाहिए। तिवारी ने कहा कि प्रदूषण पर हमारा काम अभी शुरू ही हुआ है।

10 महीने बहुत कम, दिल्ली में पलूशन कंट्रोल के लिए मनोज तिवारी ने कितना टाइम मांगा

दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण में सरकार के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए 10 महीने का समय बहुत कम है। इस समस्या को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए कम से कम दो साल का समय दिया जाना चाहिए। तिवारी ने कहा कि प्रदूषण पर हमारा काम अभी शुरू हुआ ही है और इसमें कम से कम दो साल लगेंगे।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए कम से कम दो साल का समय दिया जाना चाहिए। तिवारी ने कहा कि 10 महीने किसी भी मूल्यांकन का आधार नहीं बन सकते। प्रदूषण पर हमारा काम अभी शुरू हुआ ही है और इसमें कम से कम दो साल लगेंगे।

सरकार पहले दिन से काम कर रही

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। सरकार इस दिशा में पहले दिन से काम कर रही है। पीटीआई-वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में तिवारी ने कहा कि लोगों को सरकार पर भरोसा बनाए रखना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए। लोगों को सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों में सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदूषण को रातोंरात कम नहीं किया जा सकता। हम दिल्लीवासियों से अनुरोध करते हैं कि धैर्य रखें और उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करें। यह केवल जन सहयोग से ही संभव है।तिवारी ने एक व्यक्तिगत उदाहरण शेयर करते हुए कहा कि वह अस्थमा के मरीज हैं। पिछले वर्षों में उन्हें गंभीर प्रदूषण के कारण लगभग सवा महीने दिल्ली से बाहर रहना पड़ता था। लेकिन, इस साल यह मुश्किल दौर केवल 15 से 16 दिनों तक ही चला।

बयानों से नहीं, आंकड़ों से मूल्यांकन हो

आम आदमी पार्टी और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के बारे में बात करते हुए तिवारी ने कहा कि वर्तमान दिल्ली सरकार में प्रदूषण बढ़ने के दावे राजनीतिक बयानबाजियों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण स्तर का मूल्यांकन मात्र राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि आंकड़ों के माध्यम से किया जाना चाहिए। वायु गुणवत्ता के आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। भाजपा सांसद ने कहा कि इस साल किसी भी स्थिति में एक्यूआई 415 से ऊपर नहीं गया है, जबकि पिछले वर्षों में यह लगभग 900 तक पहुंच जाता था।

सरकार का इरादा स्पष्ट

सांसद तिवारी ने एक्यूआई आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें हास्यास्पद बताया। तिवारी ने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए सरकार का इरादा स्पष्ट है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को एक प्रमुख उपाय के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला आधारित बिजली उत्पादन से दूर हटने और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।

सीएम खुद कर रहीं यमुना के सफाई की निगरानी

यमुना प्रदूषण के मुद्दे पर तिवारी ने कहा कि नदी को साफ करने और लोगों के लिए सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कहा कि पहले यमुना लोगों के नहीं बल्कि भैंसों के अनुकूल बन गई थी। यह कचरे और रसायनों से भर गई थी। अब इसे लोगों के अनुकूल बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री खुद इस कार्य की निगरानी कर रही हैं।

सरकार अभी अपने कार्यकाल के शुरुआती चरण में

कई इंजन वाली सरकार के बारे में बात करते हुए तिवारी ने कहा कि सरकार अभी अपने कार्यकाल के शुरुआती चरण में है। उन्होंने कहा कि दो इंजन वाली सरकार पटरी पर लौट रही ट्रेन की तरह होती है। अभी हम दिल्ली को पटरी पर ला रहे हैं। हमें दो से ढाई साल का और समय दीजिए, हम दिल्ली को जीवन यापन की सुगमता के मामले में सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक बना देंगे।

240 के साथ खराब श्रेणी में AQI

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार शनिवार सुबह 9 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 240 था, जो खराब श्रेणी में आता है। वहीं, शुक्रवार को दिल्ली में वायु गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 236 पर था। इसके बाद शहर में ग्रैप-3 के तहत लागू प्रतिबंध हटा दिए गए।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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