
क्या इस दिवाली पर पलूशन से चोक हो जाएगी दिल्ली? विशेषज्ञों की राय
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर ग्रीन पटाखों को मंजूरी दी है। इस पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कड़ी निगेहबानी के आतिशबाजी पहले से ही प्रदूषित चल रही राष्ट्रीय राजधानी की हवा को और जहरीला बना सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिवाली के दौरान ग्रीन पटाखों को मंजूरी दिए जाने पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जन जागरूकता और कड़ी निगेहबानी के आतिशबाजी पहले से ही प्रदूषित हवा को और जहरीली बना सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन पटाखों से 30 फीसदी तक कम पलूशन होता है लेकिन दिवाली के दौरान भारी मात्रा में आतिशबाजी हालात को बिगाड़ सकती है।

लड़ाई जमीनी स्तर पर कमजोर
पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने अदालत के फैसले को व्यावहारिक बताया लेकिन यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पलूशन पूरे साल की समस्या है लेकिन इसको दूर करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। पलूशन के खिलाफ लड़ाई जमीनी स्तर पर कमजोर है। जिम्मेदार संस्थानों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
मेन पॉवर की कमी
अमित गुप्ता ने आगे कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) 35 फीसदी कर्मचारियों की कमी के साथ काम कर रहा है जबकि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) जैसे राज्य निकाय भी मेन पॉवर की कमी से जूझ रहे हैं।
व्यापक अभियान की दरकार
वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) में ‘एयर लैबोरेटरीज’ के पूर्व अतिरिक्त निदेशक और प्रमुख दीपांकर साहा ने कहा कि ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों का बेहतर विकल्प हैं। लेकिन बाजार में केवल अप्रूव्ड पटाखे ही बेचे जाएं ऐसा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान की जरूरत है।
इस वजह से बढ़ जाता है पलूशन
दीपांकर साहा ने हमने नियम कायदे तो बना दिए लेकिन देखा गया है कि हम अवैध पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने में असफल रहे हैं। दूसरी खास बात यह कि बड़ी संख्या में आतिशबाजी से पलूशन के स्तर में खतरनाक वृद्धि हो जाती है।
बड़े पैमाने पर आतिशबाजी बढ़ा सकती है मुश्किलें
पर्यावरणविद् और 'एनवायरोकैटालिस्ट्स' के संस्थापक सुनील दहिया कहते हैं कि ग्रीन पटाखों के फोड़ने को वैध ठहराना त्यौहार के दौरान बढ़े पलूशन को वैध ठहराने जैसा है। भले ही ग्रीन पटाखों से 30 फीसदी कम पलूशन होता है लेकिन दिवाली में बड़े पैमाने पर आतिशबाजी परेशानी बढ़ा सकती है।
दिल्ली के चोक होने के आसार कम
गौर करने वाली बात यह भी कि इस साल दीवाली काफी पहले पड़ रही है। इस कारण तापमान अन्य वर्षों की तुलना में थोड़ा ज्यादा रहने की उम्मीद है। हवा की स्पीड ठीक-ठाक रहने की उम्मीद जताई जा रही है। यही नहीं पराली से पैदा होने वाले पलूशन में कुछ देरी है। साथ ही कृत्रिम बारिश को लेकर भी तैयारियां तेज हैं। इन फैक्टर के चलते पूर्व के वर्षों की तरह इस बार पलूशन और स्मॉग के चलते दिल्ली के चोक होने की आशंकाएं अपेक्षाकृत कम हैं।
(हिन्दुस्तान संवाददाता के इनपुट के साथ)



