रात में गाड़ियां कम चलती हैं, फिर भी दिल्ली में 'नाइट शिफ्ट' में क्यों बढ़ जाता है प्रदूषण?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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राजधानी दिल्ली का प्रदूषण से हाल बेहाल है। ऐसे में एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रात के समय गाड़ियों से प्रदूषण ज्यादा हो रहा है। जानिए आखिर क्या कारण है कि रात 10 बजे से लेकर सुबह 7 बजे तक प्रदूषण बढ़ जाता है। IIT दिल्ली ने इसका समाधान भी सुझाया है।

रात में गाड़ियां कम चलती हैं, फिर भी दिल्ली में 'नाइट शिफ्ट' में क्यों बढ़ जाता है प्रदूषण?

दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने की पुरजोर कोशिशों में जुटी है। ऐसे में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि नाइट शिफ्ट में वाहनों से प्रदूषण ज्यादा हो रहा है। इस रिपोर्ट ने इसलिए हैरान कर दिया, रात में तो वाहनों की संख्या दिन के तुलना में घट जाती है, फिर ऐसा कौन सा फैक्टर रात में एक्टिव हो जाता है, जिसके चलते प्रदूषण में इजाफा हो जाता है। राहत की बात यह है कि IIT दिल्ली ने इसका समाधान भी सुझाया है। अब देखने वाली बात यह है क्या सरकार IIT के समाधान को अप्लाई करके दिल्ली के इस बढ़े प्रदूषण पर लगाम लगा पाती है। लाइव हिन्दुस्तान के साथ समझिए हर जरूरी बात।

दिल्ली में 'नाइट शिफ्ट' में वाहनों से प्रदूषण ज्यादा हो रहा

रिपोर्ट में नाइट शिफ्ट में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की बात कही गई है। इसमें मुख्य तौर पर ट्रकों को ध्यान में रखते हुए ये बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रात के समय ट्रकों से होने वाला प्रदूषण दिन की तुलना में कहीं अधिक हो जाता है। इसके समाधान के तौर पर बताया गया है, अगर 20 एंट्री प्वाइंट पर ट्रकों की आवाजाही पर लगाम लगा दी जाए, तो प्रदूषण की लड़ाई में दिल्ली को बढ़त मिल सकती है। खैर, अब थोड़ा आंकड़ों में समझते हैं, आखिर पूरी कहानी है क्या…

दिन में 23% तो रात में 61% प्रदूषण उगल रहे ट्रक

आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 18-24 फीसदी है। इनमें भी अगर हम तोड़ें, तो पता चलता है कि सबसे ज्यादा प्रदूषण ट्रकों से होता है। दिन में जहां पीएम 2.5 उत्सर्जन में ट्रकों की हिस्सेदारी 23 फीसदी होती है, रात दस बजे से लेकर सुबह सात बजे के बीच यह बढ़कर 61 फीसदी तक चली जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल, क्या रात में ट्रक ज्यादा आते हैं। तो इसका जवाब है, हां। दिल्ली के आस-पास के इलाके यानी लगभग 75% इंटरस्टेट ट्रक इसी समय दिल्ली में घुसते-निकलते हैं।

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पूरे NCR के लिए लागू हो नीति, पड़ोसी राज्य भी करें सहयोग

अब तक आप इतना तो समझ चुके हैं आखिर रात में क्यों प्रदूषण बढ़ रहा है। साथ ही ये भी पता चल गया कि ये कारण दिल्ली में नहीं, बल्कि बाहर मौजूद है। इसलिए ये क्लियर हो गया है कि इसका समाधान केवल दिल्ली तो नहीं कर सकती है। क्योंकि जब तक पड़ोसी राज्यों चाहे भले ही वो एनसीआर के इलाके ही हों, से ट्रक आते रहेंगे, देश के दिल(राजधानी दिल्ली) में प्रदूषण बढ़ता रहेगा। इसलिए सरकार को एक ऐसी नीति बनाने की जरूरत है, जो पूरे एनसीआर को समेटे, जिसके नियम सबके लिए लागू हों और इसके समाधान में पड़ोसी राज्य भी बढ़चढ़कर भूमिका निभाएं।

20 एंट्री प्वाइंट पर कंट्रोल करके बन सकती है बात

IIT दिल्ली और TERI की रिपोर्ट में इसके समाधान को लेकर कुछ बातें कही गई हैं। इस समस्या के तौर पर कहा गया है कि दिल्ली में 20 एंट्री प्वाइंट के जरिए ट्रक अंदर घुसते हैं। अगर इन एंट्री प्वाइंट पर ट्रकों की आवाजाही पर सख्ती बरती जाए, तो मामला कंट्रोल में लाया जा सकता। मतलब, प्रदूषण परमिट चेकिंग, ज्यादा प्रदूषण पैदा करने वाले वाहनों की एंट्री बैन जैसे तमाम प्रयास किए जा सकते हैं। इस तरह कहा गया है अगर इन 20 एंट्री प्वाइंट (टोल प्लाजा) पर प्रभावी कंट्रोल किया जाए, तो करीब 90 फीसदी ट्रकों की एंट्री को नियंत्रित किया जा सकता है।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta

रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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