
दिल्ली की हवा थोड़ी राहत के बाद फिर हुई जहरीली, AQI में भारी इजाफा
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में फिर से तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे शहरवासियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तेज हवा और धूप के बाद भी प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है।
दिल्ली की हवा थोड़ी राहत के बाद फिर बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है। गुरुवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 311 अंक दर्ज किया गया। 5 नंवबर की तुलना में 6 नवंबर को इसमें 109 अंक की वृद्धि दर्ज की गई। राजधानी दिल्ली के लोगों को बुधवार को तेज हवा और दिनभर निकली धूप ने प्रदूषण से खासी राहत दिलाई थी। लेकिन यह राहत 24 घंटे भी नहीं टिक पाई। दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक में 3 से 5 नवंबर के बीच डेढ़ सौ अंकों से ज्यादा का सुधार हुआ था, लेकिन गुरुवार को इसमें एक बार फिर सौ से अधिक अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राजधानी में शाम पांच बजे लगभग दो दर्जन प्रदूषण मापने वाले केंद्र में प्रदूषण का स्तर बहुत खराब स्तर पर दर्ज किया गया। प्रदूषण के स्तर में इस वृद्धि की वजह न्यूनतम तापमान में कमी और आंशिक रूप से छाए बादल माने जा रहे हैं।

दिल्ली के लोगों के लिए अक्टूबर महीने के दूसरे पखवाड़े से ही प्रदूषण की परेशानी बढ़ गई है। 14 अक्टूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से ऊपर यानी खराब श्रेणी में पहुंच गया था। इसके बाद से ही लगातार वायु गुणवत्ता का स्तर खराब या बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है। 30 अक्टूबर को इस मौसम में दिल्ली की हवा सबसे खराब रही थी। इस दिन वायु गुणवत्ता 379 अंक पर पहुंच गई थी। इस दिन राजधानी के 13 इलाकों का सूचकांक 400 से ऊपर यानी गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया था।
गुरुवार सुबह भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 278 अंक दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में आता है। सुबह ही एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (एक्यूईडब्ल्यूएस) ने वायु गुणवत्ता और खराब होने का अनुमान जताया था। अनुमान है कि आठ नवंबर तक प्रदूषण का स्तर इसी के आसपास रह सकता है। सीपीसीबी की ओर से सुबह जारी वायु गुणवत्ता बुलेटिन के अनुसार राजधानी में एक्यूआई 278 अंक पर रहा था।
सामान्य से ढाई गुणा ज्यादा हैं प्रदूषक तत्व
राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ने के कारण प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में भी बढोतरी दर्ज की गई है। यह सामान्य से ढाई गुना से ज्यादा हैं। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर की हवा में गुरुवार शाम तीन बजे प्रदूषक कण पीएम 10 का स्तर 254 और पीएम 2.5 का स्तर 155 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर रहा। हवा में पीएम 10 का स्तर 100 से नीचे और पीएम 2.5 का स्तर 60 से नीचे होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। इस तरह देखा जाए तो दिल्ली की हवा में अभी मानकों से काफी ज्यादा प्रदूषक कण मौजूद हैं।
खांसी, सांस लेने में दिक्कत के मरीज बढ़े
मौसम में होने वाले बदलाव और बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में खांसी, सांस लेने में दिक्कतें, दमा और गले में खराश, आंखों में जलन के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे राजू यादव काफी परेशान नजर आ रहे थे। बात करने पर उन्होंने कहा कि दो हफ्ते से सीने में कफ जमा है। सांस लेने में दर्द होता है। प्रदूषण इतना है कि बाहर निकलते ही आंखें जलने लगती हैं। वहीं, बीमारी से दिहाड़ी का काम बंद पड़ा है, घर का खर्चा कैसे चलेगा।
यहां पहुंचे सुधांशु ने बताया कि पिछले हफ्ते से गला ऐसा हो रहा है जैसे कोई पत्थर अटक गया हो। छींकें नहीं रुकतीं, रात में खांसी से नींद उड़ जाती है। अस्पताल के टीबी एवं छाती रोग विभाग की डॉ. सुनैना ने कहा कि नवंबर में हर साल जुकाम, गले में जलन और सांस फूलना आम हो रहा है। दिलशाद गार्डन स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल में सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अस्पतालों में लंबी कतारें
अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी के बाहर गुरुवार सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें दिखाई दीं। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्लैडबिन त्यागी का कहना है कि गले में खराश, आंखों में जलन व पानी आना, खांसी-जुकाम और सांस फूलने की शिकायतों से पीड़ित मरीज अधिक पहुंचे थे।
सबसे ज्यादा बुजुर्ग और बच्चे प्रभावित
राम मनोहर लोहिया अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ आमदिनों की अपेक्षा ज्यादा दिखी। यहां गले में खराश, खांसी, जुकाम और सांस के मरीजों की संख्या अधिक थी। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल आने वाले अधिकतर बुजुर्ग और बच्चे प्रदूषित हवा से सर्वाधिक प्रभावित हैं। कई मरीजों को नेबुलाइजर से तत्काल राहत दी जा रही है, जबकि गंभीर लक्षण वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। सीने में दर्द के मरीज भी अस्पताल आ रहे हैं। अस्पताल में प्रदूषण जनित रोग निदान केंद्र भी है। यह प्रत्येक सप्ताह सोमवार को खुलता है। लेकिन,लोग पूछताछ के लिए गुरुवार को भी पहुंचे।
1दिल्ली की वायु गुणवत्ता में हालिया सुधार अस्थायी था।
2प्रदूषण के बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में वृद्धि हुई है।
3बीमारियों के बढ़ते मामलों से अस्पतालों में भीड़ बढ़ी है।





