
एक ग्रुप और 340 लोग; दिल्ली में नक्सल प्रेमियों के फोन से निकल रही ‘साजिश’
दिल्ली में रविवार को इंडिया गेट पर प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नक्सली नारों और पुलिसकर्मियों पर हुए मिर्ची हमले के पीछे पुलिस को सुनियोजित साजिश की आशंका है। दिल्ली पुलिस ने 22 स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी के बाद उनके फोन को जब्त किया है।
दिल्ली में रविवार को इंडिया गेट पर प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नक्सली नारों और पुलिसकर्मियों पर हुए मिर्ची हमले के पीछे पुलिस को सुनियोजित साजिश की आशंका है। दिल्ली पुलिस ने 22 स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी के बाद उनके फोन को जब्त किया है। पुलिस एक सप्ताह पुराने वॉट्सऐप ग्रुप पर हुई बातचीत की भी जांच कर रही है।
उस दिन शाम के समय इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में लोग वायु प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन के लिए एकत्रित हुए थे, जिनमें अधिकतर स्टूडेंट्स थे। पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने ट्रैपिक को रोक दिया और इसमें कई एंबुलेंस भी फंस गए। जब प्रदर्शकारियों को सड़क से हटाने की कोशिश की गई तो इनमें से कई झड़प करने लगे और पुलिसकर्मियों पर मिर्ची स्प्रे से हमला कर दिया। पिछले दिनों एनकाउंटर में मारे गए खूंखार नक्सल कमांडर माडवी हिडमा के लिए नारे भी लगाए गए और उसकी तुलना बिरसा मुंडा से करते हुए पोस्टर लहराए गए।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'चूंकि सभी स्टूडेंट ज्यूडिशियल कस्टडी में है, हमारे पास उनके फोन हैं और हम उनके सोशल मीडिया ग्रुप्स की जांच कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी हिमखंड और भगत सिंह छात्र एकता मंच जैसे सगंठनों से जुड़े हुए हैं। वे दो वॉट्सऐप ग्रुप में एक्टिव थे। इनमें से एक पिछले सप्ताह क्रिएट किया गया था जिसमें 340 सदस्य थे। ऐसा प्रतीत होता है कि अवैध गतिविधियों की प्लानिंग के लिए इसे बनाया गया था।'
पुलिस ने 15 पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं, जिन्हें मिर्ची स्प्रे से हमले और झड़प के बाद आरएमएल हॉस्पिटल ले जाया गया था। अधिकारियों के मुताबिक जख्मी पुलिसकर्मियों ने बताया कि उन पर मिर्ची स्प्रे डाला गया और पिन चुभाया गया। वे कानून व्यवस्था तोड़ने की तैयारी के साथ आए थे। उनके पास पिन और 6 स्प्रे बोतलें थीं, जिन्हें जब्त किया गया है।
पुलिस का कहना है कि आयोजकों ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मांगी थी। उन्हें सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए इस प्लान का पता चला। अधिकारी ने बताया कि वॉट्सऐप ग्रुप को चलाने वाले कई सदस्य अब हिरासत में हैं। अधिकारी ने कहा, 'कुछ को पहले भी प्रदर्शन में हिरासत में लिया गया था। पहली बार बात इतनी आगे बढ़ी।'
डीसीपी (न्यू दिल्ली) देवे श कुमार महला ने कहा कि महिलाओं पर कथित हमले, जानबूझकर चोट पहुंचाने, लोक सेवकों के काम में बाधा डालने, वैध आदेशों की अवहेलना करने और आपराधिक साजिश के आरोप में दो एफआईआर दर्ज की गईं। छात्रों द्वारा नक्सल नेताओं के समर्थन में नारे लगाने के बाद, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 197 बाद में जोड़ी गई।
पुलिस ने प्रदर्शन के आयोजको के रूप में अभी तक दो छात्राओं की पहचान की है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'हमने पाया कि वे हाल ही में कुछ राजनीतिक शख्सियतों के साथ पैनल डिस्कशन में शामिल हुईं थीं। हम ब्योरा जुटा रहे हैं। हमने उन छात्रों की भी पहचान की है जो माडवी हिडमा का पोस्टर लेकर आए थे।
एचटी ने दूसरी एफआईआर की समीक्षा की जो संसद मार्ग पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। इसमें कहा गया है कि 18-20 छात्रों ने थाने के मुख्य गेट को ब्लॉक किया और सरकार, पुलिस के खिलाफ नारे लगाए। एफआईआर में लिखा है, 'वे प्रदूषण और माडवी हिडमा की मौत के खिलाफ, नक्सलवाद और आतंकवाद के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे।'





