
चेहरा छिपाया तो भी खैर नहीं, चाल से पकड़े जाएंगे गुनहगार; दिल्ली पुलिस का नया हथियार!
दिल्ली पुलिस 'गेट एनालिसिस' तकनीक के जरिए बदमाशों के चलने के अंदाज से उनकी पहचान करेगी। तिमारपुर के मर्डर केस को सुलझाने में इस वैज्ञानिक तरीके ने अहम भूमिका निभाई है।
चेहरा ढंककर या वारदात के बाद भेष बदलकर सालों तक पुलिस को चकमा देने वाले अपराधियों के लिए अब छिपना आसान नहीं होगा। पुलिस अब बदमाशों की चाल देखकर उनकी पहचान कर लेगी।
इसके लिए पुलिस 'गेट एनालिसिस' तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। अब तक इस तकनीक का उपयोग मेडिकल की जांच के दौरान डॉक्टर करते थे। अब यह तकनीक पुलिस का सशक्त हथियार बनने जा रही है। बीते साल पुलिस हत्या की एक गुत्थी भी इस तकनीक से सुलझा चुकी है। इसके अलावा पुलिस दो और तकनीकों का इस्तेमाल भी बढ़ा रही है।
ऐसे करती है काम
'गेट एनालिसिस' तकनीक का इस्तेमाल अब तक मेडिकल क्षेत्र में किया जाता रहा है। अमूमन फिजियोथेरेपिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ खिलाड़ियों की बीमारियां का पता लगाने के लिए उनके चलने के तरीके का अध्ययन करते थे। इसमें एथलीट को कहां दर्द है? या चलने में क्या दिक्कत आ रही है? इसका विश्लेषण किया जाता है। दरअसल, हर इंसान के चलने का तरीका अलग होता है। चाल के दौरान शरीर के किसी हिस्से का झुकाव, हाथ का अंदाज और पैरों का झुकाव ये सभी चीजें किसी एक व्यक्ति की दूसरे से अलग होती हैं। पुलिस इसी तकनीक की से अपराधियों की पहचान कर रही है।
हत्या का केस सुलझाने में मददगार तकनीक
दिल्ली पुलिस ने तिमारपुर इलाके में हुई 32 वर्षीय यूपीएससी अभ्यर्थी रामकेश मीना की हत्या के मामले को सुलझाने में पहली बार 'गेट एनालिसिस' तकनीक का इस्तेमाल किया। मामले की जांच में चलने के पैटर्न का वैज्ञानिक विश्लेषण कर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा। रामकेश की हत्या उसकी लिव-इन पार्टनर ने दो साथियों के साथ मिलकर की थी। जांच के दौरान पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो आरोपी का चेहरा स्पष्ट नहीं था। जिसके बाद पुलिस ने शक के आधार पर कुछ संदिग्धों की सूची तैयार की। इसके बाद सीसीटीवी में दिखाई दे रहे संदिग्धों के चलने की गति, कदमों का संतुलन और शरीर की बनावट का उन संदिग्धों से मिलान किया, तो वे पूरी तरह मेल खा गए। इसके बाद आरोपियों को दबोच लिया गया। पुलिस ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट में यह खुलासा किया कि गुजरात से फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाकर सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहे संदिग्धों के चलने के तरीके का विश्लेषण कर आरोपियों को पकड़ा गया।





