
मर्डर केस में बिना आरोपी के ट्रायल शुरू किया, दिल्ली पुलिस ने पहली बार BNSS के तहत किया ऐसा
दिल्ली पुलिस ने एक हत्या के मामले में मुख्य आरोपी जितेंद्र महतो के गिरफ्तार न होने के बावजूद, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत पहली बार उसकी गैरमौजूदगी में ट्रायल शुरू किया है।
राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाते हुए, दिल्ली पुलिस ने पहली बार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का उपयोग करके एक हत्या के मामले में आरोपी की गैरमौजूदगी में ट्रायल (trial in absentia) शुरू किया है। पुलिस ने एक ऐसे जघन्य मामले में चार्जशीट दाखिल किया है, आरोप तय किए हैं और ट्रायल शुरू कर दिया है, जहां मुख्य आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है।

BNSS धारा 356 क्या है?
BNSS की धारा 356 पुलिस और अदालतों को 'जघन्य' मामलों में घोषित अपराधियों के लिए उनकी गैर-मौजूदगी में ट्रायल चलाने की अनुमति देती है। पुलिस के अनुसार, यह कानून इसलिए लाया गया है ताकि अगर आरोपी समय पर पकड़ा न जाए, तो मामले लम्बे समय तक अटके न रहें। BNSS ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह ली है, जिसमें पहले ऐसे कोई प्रावधान नहीं थे।
क्या था मामला?
जनवरी 2024 में 68 वर्षीय रमेश भारद्वाज नरेला स्थित अपने घर से लापता हो गए थे। जांच में पता चला कि उनका कर्मचारी, जितेंद्र महतो, भी लापता है। जांच से पता चला कि पीड़ित को हाल ही में एक प्लॉट बिक्री के लिए 4.5 लाख रुपये मिले थे और उसे आखिरी बार महतो के साथ देखा गया था। फरवरी 2024 में डिजिटल निगरानी के माध्यम से महतो के बेटे अभिषेक महतो को पकड़ा गया। अभिषेक ने बताया कि उसके पिता ने भारद्वाज की हत्या कर दी थी और दोनों ने मिलकर शव को ठिकाने लगा दिया। मृतक का एक और बेटा लव भारद्वाज भी इसमें शामिल था। अभिषेक की निशानदेही पर, गली के पास एक नाले से एक बोरे में पैक किया हुआ पीड़ित का बुरी तरह से सड़ा हुआ शव बरामद किया गया।
कैसे शुरू हुआ ट्रायल?
मुख्य आरोपी जितेंद्र महतो का पता नहीं लग पाया। कोर्ट ने जून में उसे घोषित अपराधी घोषित कर दिया था। इसके बाद, दिल्ली पुलिस ने अगस्त में चार्जशीट दाखिल किया और ट्रायल शुरू करने का अनुरोध किया। नए कानून को लागू करते हुए, रोहिणी कोर्ट ने हत्या, अपहरण और आपराधिक साजिश के अपराधों के लिए आरोप तय किए और ट्रायल शुरू कर दिया। चार्ज फ्रेम होने के बाद, अब गवाहों की जांच की जाएगी और अन्य कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।





