काम की बात: दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियों के लिए गुड न्यूज, अब हर जिले में थाने के पास मिलेगी यह सुविधा
Delhi Police News: दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें ड्यूटी खत्म करने के बाद देर से घर लौटने के दौरान सुरक्षा की चिंता नहीं सताएगी। इसके लिए हर जिले में थाने के पास ही स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे।

राजन शर्मा, नई दिल्ली
दिनभर की ड्यूटी, अचानक बढ़ जाने वाली शिफ्ट और रात तक थाने में रहने के बाद घर लौटने के लिए लंबा सफर तय करना महिला पुलिस कर्मियों के लिए रोजमर्रा की चुनौती है। ड्यूटी के साथ परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाली महिला पुलिस कर्मियों की इस परेशानी को कम करने के लिए दिल्ली पुलिस अब थानों के आसपास ही उनके रहने की व्यवस्था विकसित करने जा रही है। इसके तहत आने वाले वर्षों में दिल्ली के हर जिले में महिला पुलिस कर्मियों के लिए आवासीय परिसर बनाने की योजना है। इससे उन्हें ड्यूटी स्थल के करीब रहने की सुविधा मिलेगी और नौकरी के साथ परिवार को समय देना भी आसान होगा।
पहले चरण में पांच स्थानों पर निर्माण होगा
पहले चरण में करीब 145 करोड़ रुपये की लागत से पांच स्थानों पर स्टाफ क्वार्टरों का निर्माण किया जाएगा। सभी परियोजनाएं ईपीसी मोड-1 यानी डिजाइन एंड बिल्ड आधार पर तैयार की जाएंगी। योजना के तहत फतेहपुर बेरी में पुलिस थाना और महिला स्टाफ के लिए आवासीय सुविधा बनाई जाएगी। गोविंदपुरी और अमन विहार में थाने के साथ महिला पुलिस कर्मियों के लिए स्टाफ क्वार्टर और चारदीवारी का निर्माण होगा। इसी तरह कापसहेड़ा में पुलिस थाना और 12 स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे। इनमें चार टाइप-3 और आठ टाइप-2 क्वार्टर होंगे। पालम विहार में भी 12 स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे। इनमें छह टाइप-3 और छह टाइप-2 क्वार्टर प्रस्तावित हैं। कापसहेड़ा और पालम विहार के स्टाफ क्वार्टर सभी स्टाफ के लिए उपलब्ध होंगे।
विशेष महिला हॉस्टल की सुविधा भी मिलेगी
योजना में विशेष महिला हॉस्टल बनाने का भी प्रावधान है। यह हॉस्टल विशेष तौर पर नई भर्ती होने वाली महिला पुलिस कर्मियों के लिए होगा। दूसरे जिलों या दूर के इलाकों से दिल्ली पुलिस में नौकरी करने आने वाली महिला कर्मचारियों को शुरुआती दौर में सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिल सकेगा।
यह फायदा होगा
नौकरी में महिला कर्मचारियों को भी पुरुष कर्मचारियों की तरह अलग-अलग समय पर ड्यूटी करनी पड़ती है। रात की ड्यूटी खत्म होने के बाद दूर घर जाने में लगने वाला समय और सुरक्षा की चिंता उनकी परेशानी बढ़ा देती है। थाने के पास आवास मिलने से विशेष राहत मिलेगी। साथ ही आपात स्थिति में उन्हें कम समय में ड्यूटी पर बुलाया जा सकेगा।
तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य
सभी परियोजनाओं को अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीपीडब्ल्यूडी ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। एक ही कंपनी को इमारत के डिजाइन, निर्माण और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी दी जाएगी। जिससे निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।


