दिल्ली पुलिस ने SC में दाखिल की रिपोर्ट, आईएचएफएल को समीर गेहलोत से जोड़ने का नहीं कोई लिंक
अब तक की जांच में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL), जिसे अब सम्मान कैपिटल लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, से दिए गए कर्ज और कंपनी के पूर्व प्रमोटर समीर गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं में किए गए निवेश के बीच कोई सीधा वित्तीय संबंध नहीं मिला है।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि अब तक की जांच में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL), जिसे अब सम्मान कैपिटल लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, से दिए गए कर्ज और कंपनी के पूर्व प्रमोटर समीर गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं में किए गए निवेश के बीच कोई सीधा वित्तीय संबंध नहीं मिला है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला डीएलएफ, कॉर्डिया और वाटिका समूहों से जुड़े आरोपों की जांच से संबंधित है। ईओडब्ल्यू ने यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में दाखिल की है। रिपोर्ट अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रवि कुमार सिंह की ओर से पेश की गई।
2025 में दर्ज हुई थी FIR
मामले में 15 दिसंबर 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि कुछ कॉरपोरेट समूहों ने IHFL से लिए गए कर्ज की रकम का एक हिस्सा उन उद्देश्यों से अलग इस्तेमाल किया, जिनके लिए कर्ज मंजूर किया गया था। जांच में यह भी आरोप देखा गया कि रकम का इस्तेमाल गेहलोत के लाभकारी स्वामित्व या नियंत्रण वाली संस्थाओं में निवेश के लिए किया गया।
क्या बोला ईओडब्ल्यू
इस मामले की जानकारी देते हुए ईओडब्ल्यू ने बताया कि जांच के दौरान समान कैपिटल, सेबी, एमसीए और नेशनल हाउसिंग बैंक से मिले लोन रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, फंड फ्लो, भुगतान और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। डीएलएफ मामले में 67 लोन खातों में कुल 2,212.65 करोड़ रुपये मंजूर और वितरित किए गए थे। इनसे 2,731.58 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई और सभी खाते बंद हो चुके हैं। जांच में 66 करोड़ रुपये के उस निवेश को भी देखा गया, जो डीएलएफ समूह की कंपनियों से ईएमयू में किया गया था। ईओडब्ल्यू के अनुसार यह निवेश 2014-15 में हुआ, जबकि संबंधित आईएचएफएल लोन करीब 17 महीने बाद लिया गया था। उपलब्ध रिकॉर्ड में लोन की रकम को गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं तक पहुंचने का कोई वित्तीय ट्रेल नहीं मिला।
वाटिका समूह के मामले में 113 लोन खातों में 2,832.21 करोड़ रुपये मंजूर और वितरित किए गए थे। सकल वसूली 4,291.36 करोड़ रुपये रही और सभी खाते बंद हो चुके हैं। ईओडब्ल्यू ने अग्नेस डेवलपर्स द्वारा गेहलोत से जुड़ी कंपनियों में किए गए 200 करोड़ रुपये के निवेश की भी जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक निवेश 2014 में हुआ था, जबकि संबंधित आईएचएफएल लोन 2016 में लिया गया। दो साल से अधिक के इस अंतर और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी को लोन की रकम और निवेश के बीच कोई वित्तीय कड़ी नहीं मिली।
अमेरीकॉर्प समूह से जुड़े चार लोन खातों में 154.50 करोड़ रुपये मंजूर और वितरित किए गए थे। इनसे 166.28 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई और खाते बंद हो चुके हैं। एजेंसी ने इंडियाबुल्स समूह की कंपनियों के शेयरों में निवेश तथा बाद में गेहलोत से जुड़ी संस्थाओं में निवेश से संबंधित आरोपों की भी जांच की।
रिपोर्ट में एनडी कपूर एंड कंपनी की ओर से जारी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रमाणपत्र का भी उल्लेख है। इसके अनुसार पांचों कॉरपोरेट समूहों के कुल 197 लोन खातों में 8,267.86 करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर किए गए और 11,073.77 करोड़ रुपये की सकल वसूली हुई। सभी 197 खाते बंद बताए गए हैं। हालांकि, ईओडब्ल्यू की यह रिपोर्ट जांच एजेंसी के अब तक के निष्कर्षों को दर्शाती है। इसे सुप्रीम कोर्ट का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।


