दिल्ली में LPG की कालाबाजारी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 75 सिलेंडर जब्त; एक गिरफ्तार
रसोई गैस सिलेंडर के लिए मची मारामारी के बीच दिल्ली पुलिस ने सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 75 सिलेंडर जब्त किए हैं। इस सिलसिले में एक आदमी को गिरफ्तार किया गया गया है।
रसोई गैस सिलेंडर के लिए मची मारामारी के बीच दिल्ली पुलिस ने सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 75 सिलेंडर जब्त किए हैं। इस सिलसिले में एक आदमी को गिरफ्तार किया गया गया है।
दिल्ली पुलिस ने बवाना इलाके में एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि अनिल नाम के 50 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और 75 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। आरोपी को औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी सिलेंडरों के अवैध भंडारण और परिवहन के बारे में मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर पकड़ा गया।
मिली जानकारी के आधार पर, पुलिस की एक टीम ने गुरुवार शाम बवाना में डिस्ट्रिक्ट पार्क के पास एक पिकेट लगाया। शाम करीब 4 बजे एक पिकअप ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली गई। उसमें से 27 एलपीजी सिलेंडर बरामद हुए। इनमें घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर शामिल थे। अधिकारी ने बताया कि पूछताछ करने पर आरोपी सिलेंडर से जुड़े कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। इनमें लाइसेंस, परमिट, स्टॉक रजिस्टर या मालिकाना हक का सबूत शामिल है।
पूछताछ के दौरान अनिल ने बताया कि आसपास की जगहों पर और भी सिलेंडर रखे हुए थे। उसकी इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने उस इलाके में एक फैक्टरी के पास दो कमरों और एक लोहे के शेड पर छापा मारा। अधिकारी ने बताया कि कुल 48 और सिलेंडर बरामद किए गए, जिससे बरामद किए गए सिलेंडरों की कुल संख्या 75 हो गई। ये सिलेंडर बिना किसी सुरक्षा उपाय या कानूनी अनुमति के रखे गए थे, जिससे एक गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
बता दें कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने वाले समुद्री सप्लाई मार्गों में रुकावटों की वजह से भारत में एलपीजी का संकट पैदा हो गया है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


