
गणतंत्र दिवस से पहले अवैध हथियारों की फैक्ट्री का भंडाफोड़, 20 पिस्टल सहित 5 लोग गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस समारोह से पहले भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए हैं। पुलिस ने इंटरस्टेट आर्म्स सप्लायर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए 5 गुर्गों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड है। नेटवर्क और उसके संबंधों की जानकारी के लिए आगे की जांच की जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस समारोह से पहले भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए हैं। पुलिस ने इंटरस्टेट आर्म्स सप्लायर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए 5 गुर्गों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड है। नेटवर्क और उसके संबंधों की जानकारी के लिए जांच की जा रही है।
एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सक्रिय गैंगस्टरों और कुख्यात अपराधियों को अवैध हथियार सप्लाई करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। पुलिस ने बताया कि गणतंत्र दिवस समारोह से पहले चलाए गए विशेष अभियान के तहत की गई कार्रवाई में हत्या सहित जघन्य अपराधों के आरोप में 5 संदिग्ध अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।
हथियारों का जखीरा बरामद
अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने 20 अत्याधुनिक देसी पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस और अवैध हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और भारी मात्रा में कच्चा माल बरामद किया है। 4 जनवरी को पुलिस ने कपासहेरा इलाके में जाल बिछाकर दिल्ली के पालम निवासी भरत उर्फ भारू (35) को गिरफ्तार किया। उसके पास से एक देसी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया। पूछताछ करने पर एक बड़े हथियार बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।
अवैध हथियार कारखाने का भंडाफोड़
पूछताछ के दौरान भरत ने कथित तौर पर अशरफ अली (50) का खुलासा किया, जो अपने साथियों के साथ मेरठ में एक अवैध हथियार निर्माण इकाई चला रहा था। पुलिस ने इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए मेरठ के कैली गांव में छापेमारी की और पूरी तरह से चालू अवैध हथियार कारखाने का भंडाफोड़ किया गया।
अपराधियों और गैंगस्टरों को सप्लाई
मेरठ निवासी अशरफ अली और सतीश (49) तथा मुजफ्फरनगर निवासी उपेंद्र (32) को मौके से गिरफ्तार किया गया। देसी पिस्तौलों के बड़े पैमाने पर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनरी जब्त की गई। पुलिस ने बताया कि आगे की जांच में द्वारका निवासी इम्तियाज (28) को गिरफ्तार किया गया। उसने कथित तौर पर अपराधियों और गैंगस्टरों को अवैध हथियार खरीदने और आपूर्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
डिमांड पर ही करते थे सप्लाई
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी एक सुनसान खेत में सुनियोजित तरीके से हथियार बनाने की फैक्ट्री चला रहे थे। वे भारी मशीनरी और कच्चे माल का इस्तेमाल करके अत्याधुनिक देसी पिस्तौलें बनाते थे। उन्होंने बताया कि ये हथियार अपराधियों को उनकी डिमांड पर ही सप्लाई किए जाते थे।
सभी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड है। उपेंद्र, अशरफ अली और सतीश कथित तौर पर हत्या और गैंगस्टरों से जुड़े मामलों में शामिल हैं। भरत पर हत्या के प्रयास और डकैती के कई मामले दर्ज हैं। इम्तियाज कथित तौर पर डकैती, छीन-झपट और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के कई मामलों में शामिल है। पुलिस ने बताया कि नेटवर्क और उसके संबंधों की जानकारी के लिए जांच की जा रही है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




