14 कॉल सेंटर से धोखाधड़ी का खेल, दिल्ली पुलिस ने फर्जी मैरिज ब्यूरो का भंडाफोड़ किया; सरगना गिरफ्तार

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने फर्जी मैरिज ब्यूरो का भंडाफोड़ कर गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया खासकर फेसबुक पर शादी के फर्जी विज्ञापन देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। गिरोह के सरगना ने विभिन्न शहरों में 14 फर्जी कॉल सेंटर स्थापित किए थे।

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दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला साइबर सेल ने एक इंटरस्टेट मैरिज फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने नेटवर्क के मुख्य सरगना 30 साल के प्रदीप सिंह उर्फ प्रदीप साहू को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी मूल रूप से छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा का रहने वाला है। गिरोह से जुड़े अन्य गुर्गों के बारे में पता लगाने के लिए पुलिस उससे सख्ती से पूछताछ कर रही है।

फेसबुक पर शादी के फर्जी विज्ञापन

डीसीपी आरपी मीणा के मुताबिक, पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया विशेषकर फेसबुक पर शादी के फर्जी विज्ञापन देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी प्रदीप पिछले लगभग पांच वर्षों से यह नेटवर्क चला रहा था। उसने ग्वालियर, गुना, अयोध्या और आजमगढ़ जैसे शहरों में 14 फर्जी कॉल सेंटर स्थापित किए थे। यहां काम करने वाले कर्मचारियों को विज्ञापन देकर नौकरी पर रखा जाता था और उन्हें ग्राहकों को झूठा भरोसा दिलाने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी।

5000 से 10000 रुपए ही मांगते थे

पुलिस से बचने के लिए गिरोह काफी चालाकी बरतता था। गिरोह के लोग रजिस्ट्रेशन फीस और प्रोफाइल एक्टिवेशन जैसी मनगढ़ंत सेवाओं के नाम पर अमूमन 5000 से 10000 रुपए की छोटी रकम ही मांगते थे। आरोपी का मानना था कि छोटी रकम गंवाने के बाद पीड़ित पुलिस से शिकायत या अन्य कानूनी कार्रवाई करने से बचेंगे।

झांसे में आकर 81000 रुपए ट्रांसफर कर दिए

मामले का पर्दाफाश पूर्वी आजाद नगर के रहने वाले राज की शिकायत के बाद हुआ। राज ने फेसबुक विज्ञापन देखकर इस गिरोह से संपर्क किया था और उनके झांसे में आकर क्यूआर कोड के माध्यम से लगभग 81000 रुपए ट्रांसफर कर दिए थे। जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ तो 25 अक्टूबर 2025 को साइबर थाने में केस दर्ज कराया। जांच के दौरान ठगी गई रकम शालिनी शिवरे नाम की महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर होने की पुष्टि हुई।

ग्वालियर से पकड़ा गया मुख्य आरोपी

कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस एक अन्य महिला राजकुमारी तक पहुंची, जो ग्वालियर में रिश्ते गाइड सर्विसेज के नाम से कॉल सेंटर चला रही थी। राजकुमारी ने ही पूछताछ में मास्टरमाइंड प्रदीप साहू का नाम कबूला, जिसके इशारे पर वह काम करती थी। बाद में पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी के जरिए ग्वालियर में छापा मारकर मुख्य आरोपी को दबोच लिया। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए हैं। अब तक इस गिरोह से जुड़े आठ फर्जी ट्रांजेक्शन सामने आ चुके हैं। गिरोह में शामिल अन्य लोगों और अन्य पीड़ितों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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