कंबोडिया से चल रहा इन्वेस्टमेंट फ्रॉड गैंग पकड़ा, कई राज्यों से 8 गिरफ्तार; ऐसे बनाते थे शिकार
दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय इन्वेस्टमेंट फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश कर अलग-अलग राज्यों से 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग कमीशन के आधार पर भारतीय म्यूल अकाउंट्स (फर्जी खातों) के जरिये कंबोडिया से ऑपरेट करने वाले हैंडलर्स को ठगी का पैसा भेज रहा था।

दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय इन्वेस्टमेंट फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश कर अलग-अलग राज्यों से 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग कमीशन के आधार पर भारतीय म्यूल अकाउंट्स (फर्जी खातों) के जरिये कंबोडिया से ऑपरेट करने वाले हैंडलर्स को ठगी का पैसा भेज रहा था। पुलिस की कार्रवाई में 10 हाईटेक मोबाइल फोन बरामद हुए हैं जिनमें कई म्यूल बैंक खातों की डिटेल्स थीं।
डीसीपी साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के अमित गोयल ने बताया कि दिल्ली के वसंत कुंज की रहने वाली 42 साल की एक महिला को इन्वेस्टमेंट के बहाने 15.58 लाख रुपये का चूना लगाया गया था। पीड़ित महिला की शिकायत पर साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर थाने में बीएनएस की धाराओं 318(4), 319, 308, 340 के तहत केस दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता को स्टॉक ट्रेडिंग में एक्सपर्ट गाइडेंस देने वाले वॉट्सऐप मैसेज मिले और गारंटीड रिटर्न के झूठे वादों से उन्हें फंसाया गया। झूठे और लुभावने दावों के झांसे में आकर उन्होंने ठगों को कुल 15.58 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
सर्विलांस और मनी ट्रेल से मिले सुराग
इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के बढ़ती घटनाओं को देखते हुए साइबर थाना के पुलिसकर्मियों की एक खास टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने ठगों को तक पहुंचने के लिए सर्विलांस, मनी ट्रेल एनालिसिस और डिजिटल फोरेंसिक्स पर फोकस करते हुए कई तरह की रणनीति अपनाई।
ऐसे ठगों तक पहुंची पुलिस
टेक्निकल एनालिसिस से तेलंगाना के सुनील वनपतला की पहचान हुई, जो कमीशन पर फर्जी बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता था। तेलंगाना में छापेमारी के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा लगातार पूछताछ करने पर उसने बताया कि उसने कीसारा (तेलंगाना) में एक फर्जी फर्म खोली थी और साइबर फ्रॉड के लिए एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में एक करंट अकाउंट खुलवाया था।
इसके बाद उसके साथी शंकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया, जिसने बताया कि उसने वही अकाउंट मनोज को दिया था, जिसने लखनऊ में उस अकाउंट को टेस्ट किया था। यूपी में छापेमारी के बाद संत कबीर नगर से मनोज को गिरफ्तार किया गया, जिसने बताया कि उसने आगे अकाउंट संदीप सिंह को दिया था, जो लखनऊ में अकाउंट ऑपरेशन मैनेज करता था। आगे की छापेमारी में संदीप सिंह को बनारस से गिरफ्तार किया गया, जिसने बताया कि उसने एक्सेस आदित्य प्रताप सिंह को दिया था।
टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर, आदित्य प्रताप सिंह को कोटा (राजस्थान) से गिरफ्तार किया गया, जो पूरे भारत में फर्जी अकाउंट का इंतजाम करता था और उन्हें टेलीग्राम के जरिये विदेशी हैंडलर्स को सप्लाई करता था।
ठगी की रकम सोमपाल के एक्सिस बैंक अकाउंट और राहुल के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया। सोमपाल को बरेली से और शेरू को दिल्ली के पहाड़गंज से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस द्वारा आरोपियों के कब्जे से फर्जी अकाउंट चलाने, फंड ट्रांसफर करने और बातचीत के लिए इस्तेमाल किए गए 10 मोबाइल फोन और 13 सिम कार्ड बरामद किए गए। इसके साथ ही यह भी पता चला कि पीड़ितों को फंसाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वॉट्सएप नंबर कंबोडिया से ऑपरेट किए जा रहे थे, जबकि भारतीय आरोपियों ने धोखाधड़ी की रकम को रखने और आगे भेजने के लिए फर्जी अकाउंट की सुविधा दी थी।
ठगी को अंजाम देने का तरीका
फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म : पीड़ितों से वॉट्सऐप पर इंटरनेशनल नंबरों से संपर्क किया गया और उन्हें ज्यादा रिटर्न का वादा करके फर्जी स्टॉक-ट्रेडिंग वेबसाइटों के जरिये इन्वेस्ट करने के लिए मजबूर किया गया।
फर्जी अकाउंट और मनी लॉन्ड्रिंग: धोखाधड़ी से मिले पैसे को फर्जी करंट अकाउंट में रखा गया, फिर ट्रेसिंग को मुश्किल बनाने के लिए कई भारतीय अकाउंट के जरिये इधर से उधर घुमाया गया और अंत में विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेज दिया गया।
कमीशन-बेस्ड स्ट्रक्चर : इस काम के लिए अकाउंट सप्लायर, हैंडलर और रकम को घुमाने वाले को हर स्टेज पर कमीशन मिलता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
1. वनपतला सुनील (43 साल), निवासी लक्ष्मी नगर, कीसरा, तेलंगाना
2. साकीनाला शंकर (61 साल), निवासी स्वर्णधाम नगर, तेलंगाना
3. मनोज यादव (38 साल), निवासी हरिहरपुर, संत कबीर नगर, यूपी
4. संदीप सिंह उर्फ लंकेश (30 साल), निवासी देवराय, कनकपुर, बनारस, यूपी
5. आदित्य प्रताप सिंह (23 साल), निवासी भारत नगर, बूंदी, राजस्थान
6. राहुल (30 साल), निवासी मोतिया खान चौक, नबी करीम, दिल्ली
7. शेरू (38 साल), निवासी मोतिया खान चौक, नबी करीम, दिल्ली
8. सोमपाल (34 साल), निवासी खंडेलवाल नगर, बरेली, यूपी
एमबीए ग्रेजुएट है सोमपाल
डीसीपी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला सोमपाल एमबीए ग्रेजुएट है और एक सॉफ्टवेयर कंपनी चला रहा था। जब उसका बिजनेस बंद हो गया, तो उसने अपना कॉर्पोरेट अकाउंट साइबर फ्रॉड करने वालों को बल्क ट्रांजैक्शन के लिए दे दिया, जिससे अकाउंट से जुड़ी 51 NCRP शिकायतें दर्ज हुईं।





