दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ऐक्टिव हुई MCD
दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एमसीडी ऐक्टिव हो गई है। दिल्ली नगर निगम पूरे शहर में एक सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे का मकसद उन रिहायशी जगहों की पहचान करना है, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। चाहे वह कमर्शियल मकसद से हो या गैर-रिहायशी मकसद से।

देश की राजधानी दिल्ली के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एमसीडी ऐक्टिव हो गई है। दिल्ली नगर निगम पूरे शहर में एक सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे का मकसद उन रिहायशी जगहों की पहचान करना है, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। चाहे वह कमर्शियल मकसद से हो या गैर-रिहायशी मकसद से।
इस महीने की शुरुआत में जारी एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली समेत देश के सभी राज्यों की राजधानी शहरों के नगर निगमों को इस मामले में एक पक्ष बनाया और उन्हें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इस संबंध में विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट के इस निर्देश पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर संजीव खीरवार ने सभी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया कि वे उन इलाकों में एक समय-सीमा के भीतर यह काम पूरा करें, जिन्हें विशेष रूप से रिहायशी इस्तेमाल के लिए तय किया गया है।
रिहायशी इलाकों की सभी श्रेणियां शामिल
अधिकारियों ने बताया कि इस सर्वे में रिहायशी इलाकों की सभी श्रेणियां शामिल होंगी। इनमें अनाधिकृत और नियमित कॉलोनियां, ग्रुप-हाउसिंग सोसाइटी और प्लॉट वाली बस्तियां शामिल हैं। पूरी तरह से कवरेज सुनिश्चित करने के लिए यह सर्वे दिल्ली नगर निगम सीमाओं के अंदर और आसपास के इलाकों तक की जाएगी।
फील्ड इंस्पेक्शन अनिवार्य
अधिकारी ने कहा कि फील्ड इंस्पेक्शन अनिवार्य कर दिए गए हैं। अधिकारियों को डेटा वेरिफाई करना होगा और जोन-वार उल्लंघनों की लिस्ट तैयार करनी होगी। नगर निकाय ने जोर देकर कहा है कि जांच के नतीजों के साथ उचित दस्तावेज भी होने चाहिए, क्योंकि इकट्ठा किया गया डेटा ही सुप्रीम कोर्ट में जमा किए जाने वाले हलफनामे का आधार बनेगा। वरिष्ठ अधिकारियों को उन मामलों में जवाबदेही तय करने का काम भी सौंपा गया है, जहां कोई चूक या विसंगति पाई जाती है।
सात दिनों के भीतर देनी होगी रिपोर्ट
एमसीडी के निर्देशों के अनुसार, जोनल रिपोर्ट सात दिनों के भीतर अतिरिक्त आयुक्त (इंजीनियरिंग) को जमा करनी होंगी, ताकि उन्हें एक साथ संकलित किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इस हलफनामे को एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।
बीजेपी नेता ने समय-सीमा कोअपर्याप्त बताया
इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि पूरे शहर में होने वाली इस कवायद के लिए तय समय-सीमा अपर्याप्त हो सकती है। उन्होंने मिश्रित-उपयोग वाले क्षेत्रों के फैक्ट आधारित मूल्यांकन की जरूरत पर जोर दिया।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


