दिल्ली में थम नहीं रहे हादसे; अब करावल नगर में 4 मंजिला इमारत गिरी
दिल्ली के करावल नगर में एक 4 मंजिला इमारत नाले के काम के कारण दरारें आने के बाद ढह गई। अधिकारियों ने समय रहते इमारत को खाली करा लिया था, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ।

दिल्ली के करावल नगर के प्रकाश विहार में बुधवार शाम एक 4 मंजिला इमारत ढह गई। बताया जाता है कि दोपहर में ही इमारत में दरारें दिख गई थीं। इसके बाद अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे तुरंत खाली करा लिया था। इससे हादसे में कोई भी घायल या हताहत नहीं हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और डीडीएमए की टीमें मौके पर पहुंचीं और सुरक्षा उपाय किए। फिलहाल अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि करावल नगर इलाके में बुधवार शाम को एक चार मंजिला इमारत दरारें पड़ने के बाद ढह गई। इमारत में रहने वाले लोगों को पहले ही निकाल लिया गया था। इसी कारण किसी के घायल होने या हताहत होने की खबर नहीं है। पुलिस ने बताया कि दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा के पास प्रकाश विहार में इमारत गिरने की सूचना करावल नगर थाने को शाम करीब 6.38 बजे मिली।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि उत्तर प्रदेश के नगर निकाय विभाग द्वारा पास के नाले के निर्माण या मरम्मत से संबंधित कार्य किया जा रहा था। अपराह्न करीब तीन बजे चार मंजिला इमारत में दरारें दिखाई दीं। इसके चलते अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर तुरंत इमारत को खाली करा लिया। बाद में इमारत ढह गई, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ क्योंकि घटना से पहले सभी लोगों को निकाल लिया गया था।
हादसे के बाद दमकल विभाग, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और सुरक्षा उपाय किए। अधिकारी इमारत गिरने के कारणों की जांच कर रहे हैं।
यह घटना ऐसे वक्त में हुई है जब दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब इलाके में बीते शनिवार को ही एक बहुमंजिला इमारत गिर गई थी। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी जबकि 8 अन्य घायल हुए थे। इमारत में एक कोचिंग संस्थान, कैफे और विभिन्न कार्यालयों का संचालन किया जा रहा था। हादसे के समय इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था।
यही नहीं बुधवार को ही दिल्ली के मालवीय नगर इलाके की एक तंग गली में बिना फायर एनओसी के चलाए जा रहे एक होटल में भीषण आग लग गई जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इमारत में प्रवेश और निकास का केवल एक ही गेट था जबकि खिड़कियां सील थीं। इमारत में आने जाने का एक ही मेन गेट सेंसर से संचालित होता था। इन सभी कारकों से मिलकर इमारत एक तरह से मौत का जाल बन गई थी।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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