दिल्ली में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम; 9 गिरफ्तार, 18 आधुनिक हथियार बरामद
सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए 9 गुर्गों को 18 आधुनिक हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों की मदद से भारत में टारगेट किलिंग और अस्थिरता फैलाने की योजना बना रहा था।

सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली में बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। एजेंसियां पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से जुड़े एक संदिग्ध सीमा-पार गिरोह की जांच कर रही हैं। कुल 9 गुर्गे गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से 18 आधुनिक हथियार बरामद किए हैं। यह गैंग पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के संपर्कों के जरिए मुंगेर के रास्ते कई राज्यों में हथियार पहुंचाने की फिराक में था। इस मामले में एनआईए के वांछित आरोपी शाहबाज अंसारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सनद रहे हाल ही में नोएडा से भी दो गैंगस्टरों को पकड़ा गया है जो सीधे तौर पर आईएसआई के इशारे पर काम कर रहे थे। ये लोग सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को भड़काने, स्लीपर सेल बनाने और महत्वपूर्ण जगहों की रेकी करने में शामिल थे। इनका मुख्य उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना और टारगेट किलिंग को अंजाम देना था।
सूत्रों ने बताया कि आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय राजधानी को दहलाने की एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। इस मामले में पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से जुड़े एक संदिग्ध सीमा पार गिरोह की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने नौ कथित गुर्गों से 18 आधुनिक हथियार बरामद किए हैं। ये लोग मुंगेर के रास्ते इन हथियारों को कई राज्यों में पहुंचाने की योजना बना रहे थे।
शाहबाज अंसारी की भूमिका भी जांच
सूत्रों ने बताया कि मामले में शाहबाज अंसारी की भूमिका भी जांच की जा रही है। शाहबाज अंसारी सिद्धू मूसेवाला हथियार सप्लाई मामले में NIA का वॉन्टेंड आरोपी है। वह यूपी के खुर्जा का रहने वाला है। यह घटनाक्रम पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के बाद सामने आया है। 22 अप्रैल, 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 25 भारतीयों और एक नेपाली नागरिक की जान चली गई थी।
पाक में बैठे आकाओं और ISI के इशारे पर कर रहे थे काम
बीते 24 अप्रैल को यूपी एटीएस ने नोएडा से 2 ऐसे गैंगस्टरों को अरेस्ट किया जो पाकिस्तान में बैठे आकाओं और ISI के इशारे पर काम कर रहे थे। संदिग्धों की पहचान तुषार चौहान (उर्फ हिज्बुल्लाह अली खान, 20 वर्ष) और समीर खान के रूप में हुई है। इन संदिग्धों को एक पिस्टल, जिंदा कारतूस और एक चाकू के साथ पकड़ा गया था। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई थी।
टार्गेट किलिंग को अंजाम देने की फिराक में थे गुर्गे
सूत्रों के अनुसार, ये गैंगस्टर ISI के निर्देशों पर भारत की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में थे। ATS की मानें तो ये आतंकी संगठनों और गैंगस्टरों के साथ मिलकर इंस्टाग्राम और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को बरगलाने में लगे थे। ये दोनों आतंकी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के साथ मिलकर काम करते थे। ये 'स्लीपर सेल' बनाकर टार्गेट किलिंग को अंजाम देने और संवेदनशील जगहों की रेकी करने की फिराक में थे।
हिज्बुल्लाह अली से किए गए थे ये वादे
UP ATS के अनुसार, शहजाद भट्टी ने कथित तौर पर हिज्बुल्लाह अली को 3 लाख रुपये देने का ऑफर दिया था। कुछ रकम उसे दे भी दी गई थी। हिज्बुल्लाह अली से वादा किया गया था कि हमले जब हो जाएंगे तो उसे पासपोर्ट मुहैया कराया जाएगा। उसे दुबई के रास्ते पाकिस्तान जाने से सेफ रास्ता भी मुहैया कराया जाएगा। हिज्बुल्लाह अली का सीधा संबंध ISI के उन एजेंटों से था जिन्हें 'मेजर हामिद', 'मेजर इकबाल' और 'मेजर अनवर' के नाम से जाना जाता है। इन्हीं ने हथियारों और पैसों को पहुचाने में मदद की थी।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
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