88 फीसदी दिव्यांग मरीन कमांडो को मिला न्याय; 2.46 करोड़ मुआवजे का आदेश, क्या मामला?
एक हादसे के कारण 88 फीसदी दिव्यांग हुए एक मरीन कमांडो को दिल्ली की अदालत ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पीड़ित जवान को 2.46 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। क्या है पूरा मामला?

भारतीय नौसेना के जांबाज विंग 'मार्कोस' (मरीन कमांडो) में शामिल होकर देश की सुरक्षा करने वाले एक जवान की जिंदगी को सड़क पर लापरवाही से दौड़ती एक कार ने हमेशा के लिए बदल दिया। पटियाला हाउस कोर्ट स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधीकरण (एमएसीटी) ने मामले में गंभीर रूप से घायल पीड़ित कमांडो को बड़ी राहत देते हुए 2.46 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
पीठासीन अधिकारी डॉ. अभिलाष मल्होत्रा की कोर्ट ने कार ड्राइवर की घोर लापरवाही को इस हादसे का जिम्मेदार माना और रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस कंपनी एवं प्रतिवादी पक्ष को पीड़ित जवान के भविष्य के नुकसान और इलाज की भरपाई के लिए यह पूरी रकम अदा करने का निर्देश दिया।
फैसला सुनाते समय अदालत ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि पैसा किसी व्यक्ति के दर्द, सपनों और खोए हुए जीवन को वापस नहीं ला सकता, लेकिन यह उसे सम्मानजनक जीवन जीने में मदद जरूर कर सकता है। अदालत ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि लखपत सिंह ने मार्कोस कमांडो बनने के लिए कई बेहद कठिन और कठोर प्रशिक्षणों को पार किया था, लेकिन इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने उनकी जिंदगी का रुख ही बदल दिया।
एक पल का गैर-जिम्मेदाराना रवैया जीवन कर देगा बर्बाद
अदालत ने सड़कों पर बढ़ती गाड़ियों की संख्या और ड्राइवरों की लापरवाही पर चिंता जताते हुए कहा कि वाहन चलाते समय एक पल का गैर-जिम्मेदाराना रवैया न केवल किसी की पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकता है, बल्कि देश को लखपत जैसे जांबाज कमांडो की सेवाओं से भी वंचित कर देता है।
दाहिने हिस्से में हो गए थे गंभीर फ्रैक्चर
यह हादसा वर्ष 2018 में 25 दिसंबर को दोपहर करीब दो बजे विशाखापट्टनम में हुआ था। मार्कोस जवान लखपत सिंह अपने एक दोस्त के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहे थे, तभी विशाखापट्टनम के तेलुगु थल्ली फ्लाईओवर पर पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित स्विफ्ट कार ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।
सड़क पर दूर जा गिरे; हाथ, कोहनी, पसलियों में फ्रैक्चर
दुर्घटना में लखपत सिंह सड़क पर दूर जा गिरे और उनके दाहिने हिस्से के हाथ, कोहनी, पसलियों और कूल्हे में कई गंभीर फ्रैक्चर हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने के कारण उन्हें कई दिनों तक आईसीयू में जीवन और मौत के बीच जूझना पड़ा और बाद में एयरलिफ्ट कर सैन्य अस्पताल ले जाना पड़ा।
स्थायी अनफिट किए गए थे घोषित
हादसे के कारण लखपत 88 फीसदी तक शारीरिक रूप से दिव्यांग हो गए थे। मेडिकल बोर्ड द्वारा उन्हें स्थायी अनफिट घोषित कर दिया गया, जिसके चलते वह पूरी तरह से केवल डेस्क जॉब तक ही सिमट कर रह गए और अपनी दैनिक दिनचर्या के लिए भी सहायकों पर निर्भर हो गए।
अदालत ने मामले में सभी स्थिति को देखते हुए 1,65,69,404 रुपये की मूल मुआवजा राशि तय की, जिसमें भविष्य की आय का नुकसान, पदोन्नति न मिल पाने का हर्जाना, सहायक का खर्च और चिकित्सा व्यय शामिल हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका दायर होने की तारीख (19 दिसंबर 2020) से लेकर पूरी रकम जमा होने तक 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज जोड़ने का निर्देश दिया, जिससे मुआवजे की यह कुल रकम लगभग 2.46 करोड़ रुपये हो गई।
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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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