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अब छोटे क्राइम के लिए नहीं जाना होगा जेल; दिल्ली सरकार ला रही कौन सा नया कानून?

अब छोटे क्राइम के लिए नहीं जाना होगा जेल; दिल्ली सरकार ला रही कौन सा नया कानून?

संक्षेप:

यह प्रस्तावित कानून कम से कम 10 विभागों (जैसे बिजली, दिल्ली जल बोर्ड, पर्यटन, व्यापार और कर, श्रम और आबकारी) के कई नियमों में बदलाव करेगा। उदाहरण के लिए दिल्ली जल बोर्ड की पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों को अब अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा सकता है।

Dec 18, 2025 12:35 pm ISTUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली सरकार 'जन विश्वास विधेयक 2025' का मसौदा तैयार कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्जनों छोटे-मोटे अपराधों के लिए जेल की सजा को खत्म करना है। इसका उद्देश्य दिल्ली में व्यापार के माहौल को बेहतर बनाना और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है। छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली और अदालतों पर दबाव कम होगा।

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यह प्रस्तावित कानून कम से कम 10 विभागों (जैसे बिजली, दिल्ली जल बोर्ड, पर्यटन, व्यापार और कर, श्रम और आबकारी) के कई नियमों में बदलाव करेगा। उदाहरण के लिए दिल्ली जल बोर्ड की पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों को अब अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा सकता है। बिना लाइसेंस के व्यापारी के रूप में काम करने जैसे छोटे उल्लंघन अब जेल की सजा वाले अपराध नहीं रहेंगे। एक अधिकारी के अनुसार, सात विभागों ने पहले ही अपनी राय दे दी है और मोटे तौर पर इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

फिलहाल इन 10 विभागों की ओर से दर्ज किए गए अपराधों की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी भी अभी स्पष्ट नहीं है कि इन मामलों में कितने लोगों को जेल हुई या कितनों पर जुर्माना लगाया गया। दिल्ली सरकार का यह कदम केंद्र सरकार द्वारा पारित 'जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023' की सफलता पर आधारित है। 2023 का यह अधिनियम भारत का पहला ऐसा कानून था जिसने एक साथ कई कानूनों से छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर निकाला। 11 अगस्त 2023 को लागू हुए इस कानून ने 19 मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले 42 केंद्रीय कानूनों की 183 धाराओं को बदल दिया था।

दिल्ली का अपना 'जन विश्वास' एक्ट

संसद के इसी सिद्धांत को अपनाते हुए दिल्ली सरकार अब इसे राज्य के कानूनों पर लागू करना चाहती है। इसका सीधा असर उन कानूनों पर पड़ेगा जो आम जनता के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करते हैं। छोटे व्यापारियों और उद्योगों के कामकाज को आसान बनाते हैं। अधिकारी ने समझाया कि वर्तमान व्यवस्था में छोटे अपराधों के लिए भी 'क्रिमिनल रिकॉर्ड' बन जाता है, जिससे आम लोगों और छोटे व्यापारियों को काफी परेशानी होती है।

अधिकारी ने समझाया कि वर्तमान व्यवस्था में छोटे अपराधों के लिए भी 'क्रिमिनल रिकॉर्ड' बन जाता है, जिससे आम लोगों और छोटे व्यापारियों को काफी परेशानी होती है।

आपराधिक जुर्माना (Criminal Fine): यह एक तरह की सजा है। इसके लगने पर व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Record) बन जाता है, जो भविष्य में नौकरी या व्यापार में बाधा बन सकता है।

नागरिक दंड (Civil Penalty): यह केवल आर्थिक दंड है। इसमें व्यक्ति पर केस नहीं चलाया जाता, बल्कि उससे केवल पैसे वसूले जाते हैं।

विधेयक में क्या बदलाव होंगे?

दिल्ली सरकार 'जन विश्वास विधेयक, 2025' को विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र (Winter Session) में पेश कर सकती है। इसके तहत होने वाले मुख्य बदलाव-

सजा की जगह केवल जुर्माना: जिन छोटे अपराधों के लिए अभी जेल जाना पड़ता है या आपराधिक जुर्माना लगता है, अब उनके लिए केवल आर्थिक जुर्माना (Civil Penalty) देना होगा।

वसूली का आसान तरीका: इन जुर्मानों को सरकारी बकाया (Arrears) की तरह वसूला जाएगा, जिससे लंबी अदालती कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।

नया शासन मॉडल: अधिकारी के अनुसार, "हमारा मकसद मामूली गलतियों के लिए कानूनी केस चलाने के बजाय एक ऐसा सिस्टम बनाना है जो व्यापारियों के लिए मददगार हो और नागरिकों के अनुकूल हो।"

दिल्ली से पहले कई अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों ने या तो इसी तरह के बिल और अध्यादेश (Ordinance) पास कर दिए हैं या उन्हें तैयार कर लिया है।

दिल्ली में अभी भी कई छोटे-मोटे अपराध दशकों पुराने कानूनों के तहत आते हैं, जिनमें अपराधियों को जेल भेजने तक के प्रावधान हैं। सरकार का मानना है कि आज के समय में इन कड़े प्रावधानों की जरूरत नहीं है। सरकार अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग संशोधन लाने के बजाय एक 'संबद्ध विधेयक' (Consolidated Bill) तैयार कर रही है। अगर सरकार हर विभाग के लिए अलग कानून बदलती, तो इसमें बहुत समय लगता और कई बार संशोधन करने पड़ते। अब एक ही बिल के जरिए कई विभागों के कानूनों को एक साथ बदला जा सकेगा। फिलहाल, सरकार का विधि विभाग (Law Department) इस बिल का मसौदा (Draft) तैयार कर रहा है।

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें
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