
दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर रोक का आदेश, NCR के लोगों को कैसे दे सकता है झटका; समझिए
दिल्ली सरकार ने बाहरी राज्यों की पुरानी गाड़ियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है, जिससे नोएडा-गुरुग्राम के हजारों यात्री प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों ने इसे NCR की मूल भावना और निर्बाध आवाजाही के खिलाफ बताया है।
दशकों से हजारों लोग दिल्ली में नौकरी करते हैं और घर एनसीआर में बनाते हैं। यह सपना अब मुश्किल में पड़ गया है। मंगलवार को दिल्ली सरकार ने ऐलान किया कि दिल्ली में रजिस्टर्ड नहीं होने वाली निजी गाड़ियां शहर में तभी प्रवेश कर सकेंगी, जब वे BS-VI मानक की हों। यानी गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद या गाजियाबाद से पुरानी गाड़ी लेकर आने वालों को अब रुकना पड़ेगा।
NCR का पुराना प्लान क्यों फेल हुआ?
1985 में नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) बनाया गया था। इसका मकसद दिल्ली की भीड़ कम करना और आसपास के इलाकों को साथ लेकर चलना था। लेकिन चार दशकों में ज्यादातर योजनाएं कागजों पर ही रह गईं।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव ओमेश सैगल ने कहा कि NCR का विचार पूरी तरह फ्लॉप हो गया। यह नया आदेश NCR की मूल भावना के खिलाफ है। इससे लोग ऑफिस, घर या स्कूल आने-जाने में परेशान होंगे। सैगल याद दिलाते हैं कि इंदिरा गांधी ने कभी आदेश दिया था कि दिल्ली में नए सरकारी दफ्तर नहीं बनेंगे। लेकिन आज सभी बड़े हेडक्वार्टर यहीं हैं। उनका कहना है कि NCR को सफल बनाने के लिए एक साझा मजबूत अधिकारिक संस्था चाहिए, जो अभी नहीं है।
प्रदूषण के नाम पर छोटे कदम?
एक अन्य पूर्व चीफ सेक्रेटरी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि दिल्ली सालों से अपनी क्षमता से ज्यादा बोझ उठा रही है। प्रदूषण के नाम पर ऐसे फैसले इसलिए लिए जा रहे हैं क्योंकि बड़ा समाधान निकालना मुश्किल है। दिल्ली को दिल्ली मेट्रो जैसा मॉडल चाहिए, जहां राजनीति काम नहीं रोकती।
NCR के ड्राफ्ट रीजनल प्लान 2041 में साफ लिखा है कि वाहन NCR में 40-50% प्रदूषण फैलाते हैं। प्लान राज्य सीमाओं पर निर्बाध आवाजाही की वकालत करता है। दिल्ली के 9 मुख्य प्रवेश द्वारों को साल भर जाम-मुक्त रखने की सिफारिश है। लेकिन अब बॉर्डर पर चेकिंग से जाम लग सकता है, जिससे प्रदूषण और बढ़ेगा। अधिकारियों ने महीनों पहले ही यह चिंता जताई थी।
पुरानी गाड़ियां रोकना सही तरीका?
NCRPB के पूर्व सदस्य सचिव नूर मोहम्मद इसे प्रदूषण नियंत्रण का क्रूड तरीका बताते हैं। उनका कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर ध्यान कम होने से निजी गाड़ियां बढ़ीं। दिल्ली में कितनी सरकारी गाड़ियां BS-III या BS-IV हैं? पड़ोसी इलाकों की निजी गाड़ियों को रोककर अपनी पुरानी गाड़ियों को चलाना ठीक नहीं। याद रखें, दिल्ली का विस्तार रुक गया था, इसलिए NCR बना। अब उसे ही नजरअंदाज करना सही नहीं।





