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अब वेतन, इंसेंटिव कटने का डर नहीं... 10 मिनट में डिलीवरी बंद के फैसले पर क्या बोले गिग वर्कर्स

अब वेतन, इंसेंटिव कटने का डर नहीं... 10 मिनट में डिलीवरी बंद के फैसले पर क्या बोले गिग वर्कर्स

संक्षेप:

केंद्र सरकार ने डिलीवरी ऐप्स के 10 मिनट में सामान पहुंचाने के नियम को हटाने का फैसला किया है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के लाखों गिग वर्करों को सड़क हादसों और वेतन कटौती के डर से बड़ी राहत मिलेगी।

Jan 14, 2026 06:38 am ISTAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दूध, ब्रेड, ग्रॉसरी जैसी वस्तुओं का ऑर्डर देने पर 10 मिनट में डिलीवरी देने जैसे वादे अब डिलीवरी ऐप कंपनियों को हटाने होंगे। इस फैसले से दिल्ली-एनसीआर के गिग वर्करों को बड़ी राहत मिली है। ये लोग लंबे समय से इन नियम से परेशान थे। इस कारण जान जोखिम में डालकर दोपहिया वाहन चलाना पड़ता था। कई बार हादसे का शिकार भी हो जाते थे। इस नियम के हटने से गिग वर्करों ने खुशी जताई है। सबसे बड़ी बात है कि देरी होने पर अब वेतन या इंसेंटिव कटने का डर नहीं रहेगा।

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मांगों को लेकर हड़ताल भी की थी

31 दिसंबर 2025 को गिग वर्करों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल भी की थी। इसमें 10 मिनट में डिलीवरी प्रदान करने से जुड़े नियम को खत्म करने की भी मांग थी। साथ ही, वेतन व इंसेंटिव को बढ़ाए जाने की भी मांग की थी।

सुरक्षा बढ़ेगी-कैट

केंद्र सरकार के फैसले की व्यापारिक संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सराहना की है। कैट का कहना है कि इस फैसले से लाखों गिग कर्मियों के जीवन की सुरक्षा बढ़ेगी। कैट का कहना है कि यह विषय हालिया नहीं है, बल्कि कैट ने लंबे समय से क्विक कॉमर्स के खतरनाक और अनियंत्रित मॉडल को लेकर सरकार को आगाह किया था। प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम सरकार की गिग वर्कर्स की सुरक्षा, सम्मान और जीवन को लेकर संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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जल्दी के चक्कर में दो बार पैर टूटा

एक अन्य गिग वर्कर ने इस फैसले का स्वागत किया। कहा कि दस मिनट में सामान पहुंचाने के चक्कर में उसके साथ दो हादसे हो चुके हैं जिसमें पैर टूट गया था। सरकार ने जो किया है, वह अच्छा है। बहुत दिक्कत होती थी। अब अगर हमें ज़्यादा समय मिलेगा तो सुविधा भी अधिक होगी। पहले अगर जरा भी देर होती थी तो हमारी रैंकिंग पर असर पड़ता था, रेटिंग गिर जाती थी। सरकार के इस फैसले के बाद इस तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हम सभी सुरक्षित रहेंगे।

तेजी से चलना पड़ता था

फूड डिलीवरी ब्वॉय दीपक कहते हैं, 'मैं सुबह दस से शाम सात बजे तक फूड डिलीवरी ऐप के लिए काम करता हूं। कई बार भोजन दस मिनट में पहुंचाने की समय सीमा के कारण तेज गति से बाइक चलानी पड़ती थी। इस नियम के खत्म होने से बड़ी राहत मिलेगी।'

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बिना घबराए काम करेंगे

ग्रॉसरी ऐप से जुड़े हुए मोहित ने कहा, 'पहले हर ऑर्डर एक रेस जैसा लगता था। समय पर पहुंचने के चक्कर में हादसे का खतरा हमेशा बना रहता था। अब 10 मिनट की समय सीमा हटने से काम थोड़ा आसान हो गया है। हम बिना घबराए डिलीवरी कर सकेंगे और सुरक्षित घर लौटेंगे।'

कई बार रॉन्ग साइड गया

फूड डिविलरी ब्वॉय शुभम पॉल का कहना है, 'इस नियम के कारण दबाव रहता था। ट्रैफिक हो या सिग्नल, रुकने का मतलब रेटिंग खराब होना था। मैं खुद कई बार रॉन्ग साइड चलता था। सरकार के फैसले से हम काफी खुश हैं। अब ग्राहकों को सामान भी मिल सकेगा और हमें परेशानी नहीं होगी।'

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काफी दिक्कतें हुई थीं

ग्रॉसरी डिलीवरी ब्वॉय शमशाद ने बताया कि मुझे लगता है कि यह फैसला बहुत पहले ले लेना चाहिए था। मुझे और मेरे कई दोस्तों को इसके कारण विभिन्न दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। कुछ सेकंड की देरी से हमारे इंसेंटिव और वेतन पर प्रभाव पड़ता था।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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