
दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर SC के आदेश की उड़ी धज्जियां, पुराने 'बम' की धूम
दिल्ली-एनसीआर में दीपावली के लिए ग्रीन पटाखों की आधिकारिक बिक्री शुरू होने के बावजूद, बाजार में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए पारंपरिक और प्रतिबंधित पटाखों की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिससे गुरुग्राम जैसे थोक हब में नियमों का उल्लंघन देखा जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में दीपावली की चमक के साथ पटाखों की बिक्री ने जोर पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट के 15 अक्टूबर को दिए गए फैसले के बाद शनिवार से ग्रीन पटाखों की आधिकारिक बिक्री शुरू हो गई। लेकिन कोर्ट के फैसले की खुलेआम अनदेखी हो रही है। मार्केट में पारंपरिक पटाखों की धूम मची हुई है।

ग्रीन पटाखों के साथ पुराने पटाखे भी बिक रहे
दिल्ली के सदर बाजार, जामा मस्जिद और शक्ति नगर जैसे इलाकों में सुबह 6 बजे से ही पटाखों की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोग ग्रीन पटाखे खरीद रहे हैं या नहीं, इसकी परवाह किए बिना खरीदारी में जुटे रहे। शाम होते-होते कई दुकानों का स्टॉक खत्म हो गया। ज्यादातर पैकेट्स पर QR कोड मौजूद था, जिसमें पटाखों की श्रेणी, निर्माता का नाम, ईमेल, निर्माण स्थान, CSIR-NEERI रजिस्टर्ड नंबर और PESO लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी थी।
गुरुग्राम के गडोली बाजार में नियमों का खुला उल्लंघन
गुरुग्राम के गडोली थोक बाजार, जो एनसीआर के सबसे बड़े पटाखा हब में से एक है, वहां हालात कुछ और ही थे। जिला प्रशासन ने 18 से 20 अक्टूबर तक सिर्फ NEERI-सर्टिफाइड ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति दी थी, लेकिन हकीकत में अनार, लड़ी, बुलेट बम और रॉकेट जैसे प्रतिबंधित पारंपरिक पटाखे खुलेआम बिक रहे थे।
बोरियों में भरे पटाखे गोदामों और ट्रकों से बेचे जा रहे थे। न तो कोई साइनेज था, न ही QR कोड, और न ही आग बुझाने के उपकरण। एक विक्रेता, अमित यादव ने, "पुलिस को सब पता है, लेकिन साल में एक बार ही तो हमें कमाई का मौका मिलता है। ग्राहक ग्रीन पटाखे नहीं चाहते, क्योंकि उनमें 'धमाका' नहीं होता। लोग पुराने वाले पटाखों की मांग करते हैं और हम उन्हें खाली हाथ नहीं लौटा सकते।"
गडोली में निगरानी का ढीला रवैया
हिन्दुस्तान टाइम्स की जांच में पाया गया कि गडोली के गोदामों में पुलिसकर्मी मौजूद तो थे, लेकिन कुछ व्यापारियों से गपशप कर रहे थे, तो कुछ अपने फोन में व्यस्त थे। कोई सक्रिय जांच नहीं हो रही थी। प्रशासन ने जिला और ब्लॉक-स्तरीय निगरानी टीमें बनाने का दावा किया था, लेकिन मौके पर ऐसी कोई टीम नजर नहीं आई। न तो आग बुझाने वाले यंत्र थे, न ही खरीदारों और स्टोरेज एरिया के बीच बैरिकेड्स और न ही कोई इमरजेंसी यूनिट। एक तंग गली ही प्रवेश और निकास का रास्ता थी, जिसके कारण वहां जाम की स्थिति बन गई।
व्यापारियों की अपनी मजबूरी
गडोली के व्यापारियों का कहना है कि लाइसेंस रिन्यूअल में देरी और ग्रीन पटाखों की परिभाषा को लेकर भ्रम ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक दुकानदार ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "प्रशासन ने हमें आखिरी वक्त पर अनुमति दी। हमारे पास दोनों तरह के पटाखे हैं, लेकिन ग्राहक सिर्फ पारंपरिक पटाखे चाहते हैं। अगर हम नहीं बेचेंगे, तो हमारा नुकसान होगा।"
कुछ थोक व्यापारियों ने ऑनलाइन गलत सूचनाओं और नौकरशाही की अड़चनों को भी जिम्मेदार ठहराया। एक अन्य विक्रेता ने कहा, "पैकेजिंग और QR कोड को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। कई आपूर्तिकर्ताओं को समय पर NEERI लेबल नहीं मिल पाते, इसलिए व्यापारी दूसरे राज्यों से पुराना स्टॉक मंगा लेते हैं।"
पुलिस क्या कह रही?
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर माना कि स्थिति चुनौतीपूर्ण है। सेक्टर 10 पुलिस स्टेशन के SHO इंस्पेक्टर योगेश ने बताया, 'शनिवार सुबह जब गोदाम बिक्री के लिए खुले, तो वहां भारी भीड़ थी।' अधिकारियों का कहना है कि दोपहर तक स्थिति कुछ सामान्य हुई, लेकिन रविवार और सोमवार सुबह फिर से भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। गुरुग्राम में 12 लाइसेंसधारी ग्रीन पटाखा विक्रेताओं में से सात सेक्टर 10 में हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने डिप्टी कमिश्नर अजय कुमार और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।





