
दिल्ली के नजफगढ़ नाले पर बनेगा कॉरिडोर, झटीकरा से बसई दारापुर तक 57 KM का रूट मंजूर
दिल्ली सरकार की बाढ़ नियंत्रण बोर्ड बैठक में नजफगढ़ नाले पर 57 किलोमीटर लंबा नया मोबिलिटी कॉरिडोर बनाने और 453 करोड़ रुपये के सेवा मार्गों को मंज़ूरी दी गई, जिससे ट्रैफिक कम होगा और पश्चिमी-दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के यात्रियों को राहत मिलेगी।
दिल्ली सरकार में करीब 10 साल बाद सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान राजधानी की गतिशीलता, जल निकासी क्षमता और शहरी सुरक्षा को बदलने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई।
बैठक में नजफगढ़ नाले पर 57 किलोमीटर का नया मोबिलिटी कॉरिडोर बनाने का निर्णय हुआ। नाले के दोनों तटों पर कठोर दो-लेन सेवा मार्गों का निर्माण होगा। झटीकरा से छावला ब्रिज, बसई दारापुर के बीच यह मार्ग यूईआर-2, आउटर रिंग रोड और इनर रिंग रोड के समानांतर चलता है, लेकिन वर्षों से इसका उपयोग सीमित था। इस कॉरिडोर के विकसित होने पर प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक का भार कम होगा, औद्योगिक जुड़ाव बढ़ेगा और पश्चिम व दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में 453 करोड़ की लागत से झटिकरा से बसईदारापुर तक दोनों तरफ सेवा मार्गों (सर्विस लेन) के निर्माण कार्य को मंजूरी दी गई। वहीं, नजफगढ़ नाले में जमा 91 लाख घन मीटर पुरानी गाद को हटाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। बोर्ड ने सड़क को चौड़ा करने, एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने और वैज्ञानिक गाद निस्तारण जैसे उन्नत मोबिलिटी उपायों की संभावनाओं का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए। आधुनिक ड्रेनिंग सिस्टम, एंफिबियस मशीनें और हाइड्रोलिक उपकरणों से लैस अनुभवी एजेंसियों को इन कार्यों में शामिल किया जाएगा। पर्यावरण-अनुकूल और वैज्ञानिक गाद निस्तारण प्रणाली भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होगी।
मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि कई वर्षों तक नालों की अनदेखी की गई, जिसके कारण जलभराव, ट्रैफिक जाम और अस्वच्छ वातावरण की समस्या बढ़ी। हमारी सरकार मिशन मोड में इस उपेक्षा को सुधारने का काम कर रही है। इसपरजल्द कार्य शुरू होगा।
पांच विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलेगी
घनी आबादी वाले पूर्वी दिल्ली क्षेत्रों को राहत देने के लिए ट्रंक नाला नंबर-1 के साथ एलिवेटेड रोड निर्माण का व्यवहार्यता अध्ययन भी मंजूर किया गया है। यह कॉरिडोर भीड़भाड़ कम करेगा, आवागमन सुव्यवस्थित करेगा और आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करेगा। शाहदरा लिंक ड्रेन का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जिसमें पैदल मार्ग के साथ बारापुला मॉडल पर आधारित सार्वजनिक स्थाननों का विकास होगा। इन कार्यों से गांधी नगर, सीलमपुर, मुस्तफाबाद और आसपास के क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा। इस परियोजना से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा। इससे लोगों को अवाजाही में सहूलियत होगी। जाम की समस्या नहीं होगी।





