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दिल्ली के बंद मोहल्ला क्लीनकों में बनेंगे रैन बसेरे, सरकार ने बनाया खास प्लान

दिल्ली के बंद मोहल्ला क्लीनकों में बनेंगे रैन बसेरे, सरकार ने बनाया खास प्लान

संक्षेप:

दिल्ली सरकार ने तीन चरणों में 247 मोहल्ला क्लीनिकों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है और अब इन क्लीनिकों के पोर्टा कैबिन्स को बेघरों के लिए नाइट शेल्टर्स में बदलने की योजना पर विचार कर रही है, जिसकी मौजूदा स्थिति का आकलन करने के निर्देश DUSIB को दिए गए हैं।

Dec 12, 2025 11:58 am ISTAnubhav Shakya नई दिल्ली, हिंदुस्तान टाइम्स
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दिल्ली सरकार ने कम से कम 247 मोहल्ला क्लीनिक बंद कर दिए हैं। अब सरकार इन क्लीनिकों के पोर्टा कैबिन्स को बेघरों के लिए नाइट शेल्टर्स में बदलने की योजना पर विचार कर रही है। सरकारी अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।

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बंदी के चरणबद्ध आदेश

दिल्ली सरकार ने हाल के महीनों में तीन चरणों में मोहल्ला क्लीनिकों को बंद करने के आदेश जारी किए हैं। अगस्त में 31 क्लीनिक बंद हुए, जो पोर्टा कैबिन्स या किराए की जगहों पर चल रहे थे। अक्टूबर में 121 और क्लीनिक बंद किए गए, क्योंकि ये पास के स्वास्थ्य केंद्रों से एक किलोमीटर के दायरे में थे। अब ताजा आदेश में 95 और क्लीनिक बंद करने का निर्देश दिया गया है। ये क्लीनिक 2015 में आम आदमी पार्टी सरकार ने शुरू किए थे, ताकि गरीबों को आसानी से स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

क्लिनिक के कैबिन में बनेंगे शेल्टर

सरकार ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) को निर्देश दिया है कि इन पोर्टा कैबिन्स की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाए। उपयुक्त जगहों पर इन्हें रैन बसेरों में तब्दील करने की तैयारी है। एक अधिकारी के मुताबिक, एक क्लीनिक को शेल्टर होम बनाने में करीब 10 लाख रुपये का एकमुश्त खर्च आएगा। इसमें बेड, गद्दे, कंबल और मरम्मत का खर्च शामिल है। इसके बाद हर महीने करीब 1 लाख रुपये का रखरखाव, स्टाफ और संचालन का खर्च होगा।

चुनौतियां और अड़चनें

ये योजना अच्छी है, लेकिन कई बाधाएं हैं। DUSIB की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा शेल्टर टेंट सिर्फ सर्दी में लगाए जाते हैं और बाद में हटा लिए जाते हैं। लेकिन ये पोर्टा कैबिन्स ज्यादा स्थायी हैं, इसलिए इन्हें साल भर सुरक्षित रखना पड़ेगा। इससे अतिरिक्त खर्च और सुरक्षा की समस्या होगी।

सबसे बड़ी चुनौती कानूनी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में आदेश दिया था कि दिल्ली में मौजूदा नाइट शेल्टर्स को बिना अदालत की अनुमति के नहीं हटाया जा सकता। इन नए शेल्टर्स को बंद या शिफ्ट करने पर कानूनी पेचीदगियां आ सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग और DUSIB मिलकर संयुक्त निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि आगे का फैसला लिया जा सके।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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